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Jaipur Ring Road: जयपुर. राजधानी में बड़े भारी वाहनों के प्रवेश पर रोकथाम के लिए बहुआयामी प्रोजेक्ट दक्षिणी रिंग रोड का कार्य कई सालों में पूरा होकर जनता के समक्ष सौगात दी गई। लेकिन अब भी उत्तरी रिंग रोड यानि आगरा रोड से दिल्ली रोड तक का प्रोजेक्ट बीते 11 महीने निकल जाने के बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकला है। इस साल की शुरुआत में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर हुई बैठक में जमीन अवाप्ति को लेकर निर्माण कार्य की रूपरेखा तय कर ली गई थी लेकिन इसके बाद भी जेडीए और एनएचआई ने सुध नहीं ली है।
यातायात भी होगा सुगम, जाम से मिलेगी मुक्ति्
सिर्फ 46 किलोमीटर की रिंग रोड पर ही वाहनों का संचालन हो रहा हैै। उत्तरी रिंग रोड अब तक धरातल पर नहीं उतरी है। हालांकि भारी वाहनों से शहर में बेवजह प्रवेश पर रोक लगाने के लिए 2003 में रिंग रोड बनाने पर चर्चा हुई थी। दक्षिणी रिंग रोड 46.4 किलोमीटर पर वाहनों की आवाजाही हो रही है। उत्तरी रिंग रोड 45 किलोमीटर का होगा। इससे शहर में भारी वाहनों का प्रवेश नहीं होगा। साथ ही यातायात भी सुगम होगा।
2887 करोड़ रुपए से ज्यादा होंगे खर्च
पूरे प्रोजेक्टर पर 2887 करोड़ से अधिक खर्च होंगे। यह आगरा रोड से दिल्ली रोड अचरोल के पास तक जाएगी और यहां से 200 फीट बाईपास का उपयोग कर वाहनों को अजमेर रोड तक ले जाया जाएगा। हालांकि इस पर काम नहीं हो पाया है। इस बाबत जेडीसी गौरव गोयल ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तरी रिंग रोड को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। एनएचआई को राज्य सरकार की ओर से भी पत्र लिखा गया है। हरी झंडी मिलने का इंतजार है, संभवतया नए साल में कार्य शुरू हो जाए। दोनों एजेंसियां मिलकर कार्य करेगी।
फेक्ट फ़ाइल...
-कुल लागत 2887 करोड़ रुपये
-45 किलोमीटर की होगी उत्तरी रिंग रोड
-वर्ष 2003 में रूपरेखा की गई थी तय
इन कार्यों का रखना होगा ध्यान
एनएचएआई द्वारा दिए गए एलाइनमेंट के आधार पर उत्तरी रिंग रोड को अंतिम रूप देना। आगरा रोड से सी-जोन बायपास एवं अजमेर रोड के लिए सी-जोन बायपास बनाना।नवीनतम तकनीक जैसे डीजीपीएस और हायर रिजोलेशन ड्रोन सर्वे का उपयोग करते हुए 360 मीटर चौड़े कोरिडोर सर्वे कार्य। विभिन्न विभागों से 360 मीटर चौड़े विकसित कोरिडोर के लिए डाटा संग्रहण करना। राजस्व मानचित्रों का संग्रह और डिजिटलीकरण करना, राजस्व मानचित्रों का भू-संदर्भ, अधिरोपण संपूर्ण कोरिडोर के लिए परियोजनाओं के क्रियान्वयन, मसौदा आवंटन पत्र और साइट योजनाओं की तैयारी के दौरान सहायता प्रदान करने के साथ ही परियोजना के क्रियान्वयन के लिए विभिन्न सरकारी संगठनों से वैधानिक मंजूरी प्राप्त करना। इससे प्रोजेेक्ट का गति मिलने के साथ ही परेशानियां भी दूर होगी।
Published on:
20 Dec 2021 08:50 am
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