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डम्पिंग यार्ड में अघोषित ‘अवकाश’ से ट्रांसफर स्टेशन पर लगे कचरे के ढेर

  -शहर के ट्रांसफर स्टेशन हो गए 'फुल', सुबह से सड़कों पर कचरे के लगे ढेर -लांगड़ियावास, सेवापुरा और मथुरादासपुरा में धर्मकांटे रहे बंद

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जयपुर। राजधानी में डोर—टू—डोर कचरा संग्रहण पटरी पर नहीं आ पा रहा है। दिवाली पर भी स्थिति खराब रही। शुक्रवार को लांगड़ियावास, सेवापुरा और मथुरादासपुरा में धर्माकांटे बिना किसी सूचना के बंद रहे। डम्पिंग यार्ड में अघोषित अवकाश से ट्रक अंदर नहीं जा सके और शहर के ट्रांसफर स्टेशन फुल हो गए और सड़क तक कचरा पसरा रहा। उसी का असर रहा कि शनिवार को कचरा सड़कों पर पसरा रहा। नियमित रूप से हूपर नहीं आने की वजह से लोगों ने कचरा सड़कों पर फेंकना शुरू कर दिया। बीवीजी कम्पनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि ट्रांसफर स्टेशनों पर अत्यधिक कचरा इकट्ठा होने की वजह से डोर—टू—डोर प्रभावित रहा।
हालांकि, निगम अधिकारियों का कहना है कि गोवर्धन की छुट्टी थी। इस वजह से कांटे बंद रहे। कुछ लोगों से चालू करने के लिए कहा, लेकिन शाम तक कांटे चालू नहीं हो पाए।

सुबह शहर की सड़कों पर कचरे के ढेर
राजधानी में शनिवार को सुबह शहर की सड़कों पर कचरे के ढेर देखने को मिले। परकोटे से लेकर शहर के बाहरी इलाकों में एक जैसा हाल था। चांदपोल बाजार, बाबा हरिश्चंद्र मार्ग, गोपालजी का रास्ता, चौड़ा रास्ता, वैशाली नगर, मानसरोवर, बनी पार्क , सी स्कीम में जगह—जगह कचरा पसरा हुआ था। हूपर नहीं आने से लोगों ने सड़क पर कचरा फेंकना शुरू कर दिया।


पटाखों का कचरा भी सामान्य कचरे के साथ
पटाखों के कचरे को राजधानी में अलग करने की कोई व्यवस्था नहीं की है। जबकि, इंदौर ने पहली बार दिवाली पर निकलने वाले कचरे को अलग एकत्र किया है। इसके लिए अलग—अलग डिपो पर कंटेनर में इकट्ठा किया और इसको अलग से नष्ट किया गया। निगम अधिकारियों ने यह प्रयोग पर्यावरण वैज्ञानिकों की सलाह पर किया गया था। वैज्ञानिकों ने तर्क दिया था कि मेटल से लेकर अधजला बारूद सहित अन्य खतरनाक चीजें इसमें शामिल हैं। इस वजह से इसको अलग करना जरूरी है।
वहीं, राजधानी जयपुर की बात करें तो यहां पर पटाखों से निकला करीब 100 टन कचरा सामान्य कचरे में ही डालकर ले जाया गया और सामान्य कचरे में ही डाला गया।