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ग्रेटर नगर निगमः कम्पनी को लगा भुगतान नहीं होगा, वायरल कर दिए ऑडियो-वीडियो!

बीवीजी कम्पनी के 276 करोड़ के बिल भुगतान के बदले 10 फीसदी कमीशन के ऑडियो-वीडियो वायरल करने के पीछे कम्पनी के ही अधिकारियों की रणनीति होने की आशंका है।

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jaipur greater nagar nigam BVG Company

जयपुर। बीवीजी कम्पनी के 276 करोड़ के बिल भुगतान के बदले 10 फीसदी कमीशन के ऑडियो-वीडियो वायरल करने के पीछे कम्पनी के ही अधिकारियों की रणनीति होने की आशंका है। सूत्रों के अनुसार पांचबत्ती स्थित एक संगठन के जिस कार्यालय में बीवीजी के दोनों अधिकारी गए, वहां के विजिटर रजिस्टर की फोटो भी वायरल हुई हैं। कम्पनी को जब लगा कि सौम्या गुर्जर महापौर रहते बकाया बिलों का भुगतान नहीं करेंगी तो ऑडियो-वीडियो योजनाबद्ध तरीके से वायरल किए गए।

इन ऑडियो-वीडियो की दोनों नगर निगमों में चर्चा रही। निगम कर्मचारियों ने दबी जुबां में माना कि पहले वीडियो बनाया, फिर अपने फायदे के लिए वायरल किया गया है। इधर, निलम्बित महापौर सौम्या गुर्जर और उनके पति राजाराम गुर्जर को राहत मिलती नहीं दिख रही। एक तरफ तो वायरल ऑडियो-वीडियो मामले में एसीबी ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर महापौर के निलम्बन मामले में सुनवाई सोमवार को होगी।

कुल 302 करोड़ बकाया
निगम में कम्पनी के 302 करोड़ रुपए बकाया हैं। दोनों निगमों के लिए इसका भुगतान करना आसान नहीं है। चार में से 2 वर्ष तक तो निगम की ओर से थर्ड पार्टी से निगरानी तक नहीं करवाई गई। बिल का फाइनल भुगतान इसी रिपोर्ट के आधार पर होगा। ऐसे में जो भी पुरानी फाइलों पर हस्ताक्षर करेगा, उसी पर सवालिया निशान खड़ा होगा।

यहां कम्पनी खुद ही फंसी
- वीडियो-ऑडियो रिकॉर्ड करने, सही समय पर वायरल करने से माना जा रहा है?कि इसमें कम्पनी के ही अधिकारियों का हाथ है।

- मामला बिगड़ा तो कम्पनी के प्रतिनिधि ने सफाई में कहा कि बात सीएसआर फंड की हो रही थी लेकिन सवाल यह है कि राजाराम गुर्जर से इसका क्या संबंध है?

बिल अटकने के 3 बड़े कारण
1. कम्पनी शहर में चार वर्ष से कचरा उठा रही है। इनमें से 2 वर्षों की थर्ड पार्टी से निगरानी ही नहीं हुई तो इस अवधि के बिल अब कैसे फाइनल हों।

2. स्वायत्त शासन विभाग के 20 अप्रेल के आदेश के बाद हैरिटेज निगम में नया अनुबंध कर लिया लेकिन ग्रेटर में यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई।

3. पुराने बिलों का निस्तारण ग्रेटर निगम को करना है। भुगतान 60 फीसदी ग्रेटर और 40 फीसदी हैरिटेज निगम करेगा। जबकि 20 अप्रेल के बाद से हैरिटेज निगम ने अपना भुगतान अलग से करना शुरू कर दिया है।

अभी तक ऐसे हुआ भुगतान
मार्च 2017 के बाद से कम्पनी को एक भी महीने का पूरा भुगतान नहीं किया गया है। निगम के अधिकारियों ने 50-60 फीसदी ही भुगतान किया। ऐसे में दोनों निगमों पर बकाया राशि बढ़कर 302 करोड़ तक पहुंच गई।

पत्रिका तक ऐसे पहुंचे ऑडियो-वीडियो
गुरुवार दोपहर 1:35 बजे पत्रिका रिपोर्टर के पास लैंडलाइन नम्बर से फोन आया। कहा कि ग्रेटर निगम मुख्यालय की विजिलेंस शाखा के ऑफिस के पास बेसमेंट में सीढिय़ों पर एक डिब्बा रखा है। उसमें महापौर से संबंधित सामान हैं। यह कहकर फोन काट दिया गया। रिपोर्टर ने वहां पहुंचकर देखा तो डिब्बे में पेनड्राइव थी। उसमें ऑडियो-वीडियो थे।

निगम के प्रोजेक्ट कार्यालय पहुंची एसीबी टीम, जब्त किए दस्तावेज
पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम और बीवीजी कम्पनी के प्रतिनिधियों के बीच कथित कमीशन के रुपयों को लेकर बातचीत का ऑडियो-वीडियो वायरल होने के दूसरे दिन शुक्रवार को एसीबी टीम नगर निगम के प्रोजेक्ट कार्यालय पहुंची। एसीबी के डीजी बीएल सोनी ने बताया कि एएसपी बजरंग सिंह शेखावत के नेतृत्व में 20 अफसरों-कर्मचारियों की तीन टीमों ने कचरा प्रबंधन से जुड़ी फाइलों खंगाली।

रात तक जांच
एसीबी टीम दोपहर एक बजे प्रोजेक्ट कार्यालय पहुंची और बीवीजी कंपनी से संबंधित रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज जब्त किए। कंपनी के खिलाफ कौन-कौनसी शिकायतें कब मिली, उन पर क्या कार्रवाई हुई, इनसे जुड़े दस्तावेजों के कई फाइलों की जांच करने में जुटी थी। एसीबी ऑडियो-वीडियो की एफएसएल से जांच भी कराएगी।