जयपुर। शौमेन की याद में अकॉर्डियन बजा रहे हैं शेर मोहम्मद जयपुर के सोडाला में रहने वाले शेर मोहम्मद कहते हैं कि पियानो अकॉर्डियन राजकपूर का सबसे पसंदीदा साज़ रहा है। ऐसे में मेरी मंशा है कि यह साज़ कभी भी लुप्त ना हो। इसलिए विभिन्न कार्यक्रमों को ख़ास बनाने के लिए इस साज़ पर अपनी प्रस्तुतियां दे रहा हूं। इस साज का प्रयोग ज़्यादातर विदेशी कलाकार आर्केस्ट्रा में किया करते हैं। गले में लटकाकर बजाया जाने वाला यह साज़ राजकपूर की फिल्म ‘संगम’ से ज़्यादा प्रचनल में आ गया था। अभी भी पुराने गीतों में यही बजता है। 1950 से 80 तक इस साज का खूब बोलबाला था। इसका सबसे अधिक इस्तेमाल संगीतकार शंकर जयकिशन ने किया।
शेर मोहम्मद ने बताया कि पहले के मुकाबले अभी उतने कार्यक्रम नहीं होते पर 90 के दशक तक हर महीने 10-20 कार्यक्रम होते थे। जिसमें उन्हें इस वाद्य यंत्र को बजाने का मौका मिलता था। अब वे इसे घर में और ख़ास प्रोग्रामों में ही बजाते हैं। उन्होंने कहा कि अब इसके विकल्प के रूप में कई लोग की-बोर्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हर साज अपनी जगह सही है। वाद्ययंत्र की गुणवत्ता उसके असली साज़ में होती है। उनके मुताबिक, राज कपूर अपनी सभी फिल्मों में एक सिग्नेचर ट्यून बनाने के लिए इस साज़ का इस्तेमाल किया करते थे। हालांकि यह साज़ बाज़ार से ख़त्म सा होता जा रहा है और इसके शिक्षकों की भी कमी होती जा रहा है। बावजूद उनका हौसला इस साज़ को पहचान दिलाने में लगा हुआ है। हाल ही में शहर के जवाहर कला में हुए समर कैंप कार्यक्रम में शेर मोहम्मद ने पियानो अकॉर्डियन बजाकर नई पीढ़ी को लुभाया।
नामी संगीतकारों के साथ मिलाई ताल से ताल
भारतीय सिनेमा के मशहूर संगीतकार नौशाद अली, संगीतकार रवींद्र जैन, ग़ज़ल गायक भूपेंद्र, ग़ज़ल गायिका पिनाज मसानी, ग़ज़ल गायक तलत अजीज, संगीतकार रवि सहित कई कलाकारों के साथ शेर मोहम्मद ने मंच पर ताल से ताल मिलाई है। उन्हें पियानो अकॉर्डियन के अलावा की-बोर्ड, सिंथेसाइजर और कई अनगिनत साज़ बजाने में महारथ हासिल है। शेर मोहम्मद संगीत के माध्यम से अपनी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।