जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह संपन्न
जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र का कहना है कि संस्कृत के पुरातन ग्रंथों का हिन्दी और दूसरी भाषाओं में बड़े स्तर पर अनुवाद आवश्यक है। राज्यपाल जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक विषयों को संस्कृत शिक्षा के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय को भारतीय जीवन दर्शन से जुड़े मौलिक शोध और अनुसंधान का महत्वपूर्ण केन्द्र बनाने का आह्वान किया।
उनका कहना था कि संस्कृत में लिखित चारों वेदों में ही प्राचीन ऋषि.मुनियों के संदर्भ समाहित हैं। उन्होंने कहा कि भारत में विद्या अध्ययन.अध्यापन की प्राचीन परम्परा रही है। कुलपति का संबोधन उन आचार्यों के लिए प्रयुक्त होता था जिनके आश्रम में दस हजार से अधिक विद्यार्थी विद्या ग्रहण करते थे। आगे चलकर गुरुकुल अथवा आश्रम अपने वृहद स्वरूपों के कारण विश्वविद्यालय में परिवर्तित हो गए।
संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयासरत: डॉ.बीडी कल्ला
समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ.बीडी कल्ला ने कहा कि संस्कृत के प्रसार को लेकर राज्य सरकार सतत प्रयत्नशील है। संस्कृत शिक्षा और संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही प्रदेश में अलग से संस्कृत शिक्षा निदेशालय और संस्कृत अकादमी का संचालन किया जा रहा है। कुलपति डॉ.अनुला मौर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय में संविधान पार्क और वैदिक परंपरा के अनुसार नक्षत्र वाटिका व नवग्रह वाटिका की स्थापना भी की जा रही है। कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शिक्षणेत्तर गतिविधियों और विकास कार्यों का प्रगति प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया। कुलसचिव रंजीता गौतम ने बताया कि दीक्षान्त समारोह में शैक्षणिक सत्र 2019 और 2020 के सफल 16851 विद्यार्थियों को डिग्रियां व 23 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इसके साथ ही सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 31 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कार्य परिषद और विद्या परिषद के सदस्य,शिक्षक और विद्यार्थी प्रत्यक्ष और ऑनलाइन उपस्थित रहे। मंगलाचरण डॉ. शंभु कुमार झा और कार्यक्रम का संचालन शास्त्री कोसलेंद्रदास ने किया।