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Inflation in States : पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा महंगाई, राजस्थान भी देश के 10 सबसे महंगे राज्यों में

आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी महंगाई लोगों का बजट बिगाड़ रही है और इस महंगाई में सबसे अधिक हिस्सा खाद्य महंगाई का है। खाद्य महंगाई में भी अधिकतर महंगाई महंगे खाद्य तेल, ईंधन और मसालों की वजह से है। महंगाई के कारण काफी कुछ ग्लोबल भी हैं। इसलिए फिलहाल महंगाई से राहत मिलने के आसार नहीं हैं...

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आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी महंगाई लोगों का बजट बिगाड़ रही है और इस महंगाई में खाद्य महंगाई का है सबसे अधिक हिस्सा।

ऐसा लगता है कि अब वर्ष 2022 में तो महंगाई से पीछा छूटने वाला नहीं है। 12 मई गुरुवार शाम को आए अप्रैल महीने की महंगाई के आंकड़ों ने बीते 8 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। आम आदमी पर सबसे ज्यादा आफत खाने पीने के सामानों की कीमतों ने दी है, वहीं कपड़े लत्ते से लेकर जूतों तक के दाम तेजी से बढ़े हैं।

सरकार की इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश के किस राज्य में महंगाई की मार सबसे ज्यादा है। वहीं कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां राष्ट्रीय औसत से महंगाई की दर काफी कम है। गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार देश में महंगाई दर 7.79 प्रतिशत है। जबकि पिछले साल अप्रैल में खुदरा महंगाई 4.23 फीसदी पर थी। आंकड़ों पर गौर करें तो पश्चिम बंगाल, एमपी और यूपी जैसे राज्यों में महंगाई की दर राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। वहीं उत्तराखंड हिमाचल और दिल्ली में लोगों पर महंगाई की मार दूसरे राज्यों से थोड़ी कम पड़ी है।

आंकड़ों में समझिए कहां है आपका राज्य

देश के कई राज्य ऐसे हैं जहां राष्ट्रीय औसत महंगाई दर 7.79 फीसदी से अधिक है। इनमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में महंगाई इस औसत से ज्यादा है। यूपी में महंगाई 8.46, हरियाणा में 8.95, झारखंड में 7.80, मध्य प्रदेश में 9.10, महाराष्ट्र में 8.78, गुजरात में 8.20 और राजस्थान में 8.12 फीसदी महंगाई दर है। वहीं, दिल्ली में महंगाई दर केवल 6.58 फीसद है तो बिहार में 7.56 फीसद और उत्तराखंड में 6.77 फीसदी है।

आइए अब बताते हैं कि कौन से खाद्य और दूसरी उपभोक्ता आइटम्स में महंगाई दर ज्यादा है...

खुदरा महंगाई में खाद्य और पेय पदार्थों को मिलता है 45 फीसदी वजन

थोक महंगाई में थोक विक्रेताओं के बिंदु पर कीमतों में वृद्धि को मापा जाता है और केवल वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को ध्यान में रखता है, जबकि खुदरा महंगाई में खुदरा विक्रेता के बिंदु पर मूल्य वृद्धि को मापा है और इसमें वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को शामिल किया जाता है। थोक महंगाई में सबसे अधिक 64.23 फीसदी भारांक विनिर्मित वस्तुओं का है। जबकि खुदरा महंगाई में सबसे अधिक 45 फीसदी भारांक खाद्य और पेय पदार्थों को दिया गया है।

फिर बढ़ेंगी ब्याज दरें?
जनवरी, 2022 से देश में खुदरा मुद्रास्फीति लगातार छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। पिछले महीने रिजर्व बैंक की अचानक आयोजित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी का प्रतिकूल प्रभाव घरेलू बाजार में भी दिखाई दे रहा है, और आगे मुद्रास्फीति का दबाव जारी रहने की संभावना है। महंगाई पर लगाम लगाने के लिए आरबीआई ने हाल ही में रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ाया था। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikant Das) ने इस महीने के शुरुआत में अचानक रेपो रेट में बढ़ोतरी की घोषणा की थी। अब इस पसीने छुड़ाती महंगाई दर को देखते हुए माना जा रहा है कि आगे फिर ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।