
Madras High Court
बेंगलूरु. कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि 18 साल की उम्र से पहले की शादी को रद्द नहीं किया जा सकता है। पीठ ने इस संबंध में पारिवारिक अदालत के पहले के आदेश को रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस पीबी वराले और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी ने यह आदेश महिला की ओर से दायर याचिका पर दिया।
कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5(3) के अनुसार, लड़के की उम्र 21 व लड़की की 18 साल होनी चाहिए। लेकिन, विवाह रद्द करने के लिए धारा के अनुरूप सबूत भी होने चाहिए। इस पूरे मामले में शादी के वक्त महिला नाबालिग थी। इसकी जानकारी होने पर उसके पति ने फैमिली कोर्ट में उसके खिलाफ याचिका दायर की थी।
फैमिली कोर्ट ने 8 जनवरी 2015 को शादी रद्द करने के संबंध में आदेश दिया था। इसे महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पीठ ने कहा कि विवाह के लिए 18 वर्ष की आयु तय करने वाले नियम को अधिनियम की धारा 11 से बाहर रखा जा रहा है। विवाह रद्द करने के अलावा तथ्यों को धारा 5 व नियम 1, 4 और 5 के विपरीत होना चाहिए। इसलिए इस मामले में विवाह को रद्द करना लागू नहीं किया जा सकता है।
हाईकोर्ट: फैमिली कोर्ट का आदेश किया रद्द
जून 2012 में जब याचिका-कर्ता की शादी हुई थी, तब वह नाबालिग थी। पति को इसका पता बाद में चला। उसने फैमिली कोर्ट में अर्जी दायर कर शादी रद्द करने की मांग की। फैमिली कोर्ट ने फैसला दिया कि हिंदू विवाह अधिनियम के मुताबिक, दुल्हन की उम्र 18 साल होनी चाहिए। इस मामले में दुल्हन की उम्र 16 साल, 11 महीने और 8 दिन थी। यह विवाह हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत मान्य नहीं होगा।
Published on:
25 Jan 2023 05:16 pm
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