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अधिकारियों के लिए मजाक बन गई ग्राम सभा, नियमों की धज्जियां उड़ाकर दिया तुगलकी आदेश

सर्वोच्च संवैधानिक दर्जा प्राप्त ग्राम सभा भी इन दिनों अधिकारियों के लिए मजाक बन गई है।

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gram Sabha

जयपुर। सर्वोच्च संवैधानिक दर्जा प्राप्त ग्राम सभा भी इन दिनों अधिकारियों के लिए मजाक बन गई है। इसको लेकर अब अधिकारी पंचायती राज नियमों की धज्जियां उड़ाकर तुगलकी आदेश जारी करने लग गए हैं। कुछ ऐसा ही आदेश गुरुवार को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुदर्शन सेठी ने जारी कर प्रदेश के समस्त जिला कलक्टरों को सोलह व सत्रह मार्च को ग्राम सभा की बैठकें करने का निर्देश दिया है। बैठक में प्रधानमंत्री आवसीय योजना के वंचित पात्र व्यक्तियों का चयन करने के लिए कहा गया है। ऐसे में अब जिला कलक्टर आनन-फानन में सम्बन्धित अधिकारियों को ग्राम सभा आयोजित करने के लिए कह रहे हैं। आदेश जारी होने एवं ग्राम सभा आयोजित करने की तिथि के मध्य कम से कम तीन दिन की कालावधि होनी चाहिए। एेसे में दबाव में अब सरपंचों को ग्राम सभाओंं का आयोजन करना पड़ेगा।

एक दिन के नोटिस पर कैसे जुटेगा कोरम
बैठक के कोरम को लेकर पंचायती राज नियम 1996 में स्पष्ट प्रावधान है कि ग्राम पंचायत के वयस्क मतदाताआें के दशांश से ग्राम सभा कोरम पूरा होता है। इसमें प्रत्येक वर्ग की महिला एवं पुरुष के दसवें भाग के हस्ताक्षर के रूप में उपस्थिति अनिवार्य है। ऐसे में एक दिन के नोटिस में ग्राम सभाओं में कोरम पूर्ति होना मुश्किल होगा।

होंगी सात हजार ग्राम सभाएं
पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र व्यक्तियों के चयन के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से 22 फरवरी को आदेश जारी कर आठ से बारह मार्च के बीच में ग्राम सभा आयोजित करने को लेकर निर्देशित किया गया था, लेकिन सरपंच संघ एवं ग्राम सेवक संघ के विरोध के चलते यह ग्राम सभाएं आयोजित नहीं हो पाई। अब इस आदेश के कारण प्रदेश की 9891 ग्राम पंचायतों मेें से करीब सात हजार ग्राम पंचायतों में मात्र एक दिन के नोटिस पर सोलह मार्च को ग्राम सभाएं आयोजित होने जा रही है।