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चुनावी साल- राजस्थान में ‘ संवाद’ से कर्मचारियों को ‘साधने’ की कोशिश में सरकार

कर्मचारी संगठनों की सभाओं में पहुंच कर मंत्री बन रहे हैं सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद के सेतुमुख्यमंत्री ने 26 जनवरी को कहा था-कर्मचारियों से हमने संवाद नहीं किया और हमारी सरकार चली गई

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जयपुर।
राज्य सरकार 10 फरवरी को विधान सभा में चुनावी साल का बजट पेश करेगी। इसमें सरकार सभी वर्गों को साधने के लिए घोषणांए भी कर सकती है। लेकिन इससे पहले सरकार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारी संगठनों को भी संवाद के जरिए साधने की कोशिश कर रही है। अब कर्मचारी संगठनों की सभाओं में सरकार के मंत्री पहुंच रहे हैं और मुख्यमंत्री तक उनकी बात पहुंचा कर उनकी मांगों का समाधान कराने की भरोसा दे रहे हैं।

कर्मचारी महासंघ की रैली-शाम को मुख्यमंत्री ने की कर्मचारी नेताओं से बात
24 फरवरी को अखिल राजस्थान कर्मचारी महासंघ के आव्हान पर सिविल लाइंस फाटक पर 82 कर्मचारी संगठनों से जुडे कर्मचारियों की आक्रोश रैली हुई। इसमें 50 हजार से ज्यादा कर्मचारी शामिल हुए। शाम को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महासंघ के अध्यक्ष आयुदान सिंह कविया,महामंत्री तेज सिंह राठौड़ व अन्य पदाधिकारियों से वार्ता की और मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

3 फरवरी को राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ के आव्हान पर 9 सूत्री मांगों को पूरा करने के लिए ध्यानाकर्षण रैली निकाली गई। इस रैली में शाम को खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास पहुंचे और कर्मचारियों को संबोधित करके कहा कि मुख्यमंत्री से बात करके मांगों को पूरा कराया जाएगा।
31 जनवरी को शहीद स्मारक पर राजस्थान राजस्व मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के आव्हान पर शहीद स्मारक पर संघ अध्यक्ष शंभू सिंह राठौड़ के नेतृत्व में धरना दिया गया। शाम को राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने संघ के पदाधिकारियों को विधान सभा बुला कर बात की और मांगों को पूरा करने की बात कही।

कर्मचारी नाराज थे-हमारी सरकार चली गई
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 26 जनवरी को मीडिया से बातचीत में कहा था कि कर्मचारियों की नाराजगी से एक बार हमारी सरकार चली गई। उस समय कुछ हमारी भी गलती रही थी। हमने कर्मचारियों से संवाद नहीं किया। उस समय मैं नया था और अनुभव भी नहीं था।