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शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ईआरसीपी पर खुली बहस की चुनौती दी

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) पर खुले मंच पर बहस की चुनौती दी। शेखावत ने कहा कि राजस्थान सरकार ईआरसीपी पर राजनीतिक पाप कर रही है। राष्ट्रीय परियोजना के नाम पर 10 जिलों के प्यासे कंठों पर राजनीति कर रही है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Aug 24, 2023

शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ईआरसीपी पर खुली बहस की चुनौती दी

शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ईआरसीपी पर खुली बहस की चुनौती दी

जयपुर। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) पर खुले मंच पर बहस की चुनौती दी। शेखावत ने कहा कि राजस्थान सरकार ईआरसीपी पर राजनीतिक पाप कर रही है। राष्ट्रीय परियोजना के नाम पर 10 जिलों के प्यासे कंठों पर राजनीति कर रही है।

उन्होंने कहा कि सीएम गहलोत जयपुर या राजस्थान में किसी भी जगह, क्योंकि उनके पैरों में चोट लगी है तो राजस्थान से बाहर जाना वो पसंद नहीं करेंगे, खुले मंच पर ईआरसीपी पर मुझसे बहस कर लें। जयपुर में सचिवालय, विधानसभा या अल्बर्ट हॉल के सामने खुला मंच लगा लें। यदि उनकी खुद की इच्छा हो तो खुद आ जाएं, वरना अपने किसी सबसे काबिल मंत्री को भेज दें या अपने सबसे काबिल सचिव को लेकर आ जाएं। मैं खुले मंच पर बहस करने के लिए तैयार हूं। मैं सिद्ध करूंगा कि राजस्थान सरकार ईआरसीपी पर राजनीतिक पाप कर रही है।

इनके मोटरसाइकिल पर बैठने लायक विधायक बचेंगे

शेखावत ने कहा कि वर्ष 2013 में भी सीएम अशोक गहलोत ने इसी तरह की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थीं। खुद को देश और दुनिया का नंबर वन मुख्यमंत्री बता रहे थे। फिर भी राजस्थान की जनता ने उन्हें सिरे से नाकार दिया था। जनता ने इन्हें 21 सीटों पर समेट दिया था। इस बार तो कांग्रेस के विधायक विधानसभा में खड़े होकर कहते हैं कि हमारी पार्टी ने जिस तरह के भ्रष्टाचार किया है, हमारी पार्टी के फॉर्च्यूनर और इनोवा में आने लायक विधायक भी नहीं बचेंगे। मुझे लगता है कि अबकी बार यह हम दो, हमारे दो वाली मोटरसाइकिल पर बैठकर जाने लायक बचेंगे।

राजस्थान ने जताई थी असहमति

ईआरसीपी की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए शेखावत ने कहा कि वर्ष 2004 से पहले अटलजी की सरकार ने नदियों को जोड़ने की परियोजना बनाई थी। देश के 31 लिंक्स में से एक पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चिह्नित हुआ था, लेकिन राजस्थान की असहमति के कारण से उस लिंक को उसी समय स्थगित कर दिया गया था। वर्ष 2016 में वसुंधरा सरकार ने ईआरसीपी की परिकल्पना की और वर्ष 2017 में वाप्कोस को डिजाइन बनाने के लिए दिया। हालांकि, देश के तय मानक 75 प्रतिशत के बजाय इसे 50 प्रतिशत डिपेंडेबिलिटी पर बनाया, जिसे स्वीकृति नहीं मिली। सीडब्ल्यूसी ने इसे सही करके बनाने के लिए कहा, लेकिन दुर्भाग्य से वसुंधरा जी की सरकार बदल गई।

दस बार रखी बैठक, कोई नहीं आया

शेखावत ने कहा कि ईआरसीपी को लेकर हमने दस बार मीटिंग रखीं, लेकिन राजस्थान सरकार के मंत्री किसी बैठक में उपस्थित नहीं हुए। अब प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में ईआरसीपी परियोजना को पुरानी पीकेसी के साथ जोड़कर एक नई परियोजना बनाई है। इससे राजस्थान को 2500 एमसीएम पानी मिलेगा। 40 हजार करोड़ की इस परियोजना में 36 हजार करोड़ केंद्र सरकार देगी, लेकिन राजस्थान सरकार इसे राजनीतिक कारणों से स्वीकृति नहीं दे रही, जबकि मध्यप्रदेश ने इसे मंजूरी दे दी है।

टाइगर देखने आ सकती हैं, पर बहनों के लिए लड़ना गवारा नहीं

शेखावत ने कहा कि किस तरह से एक छोटी बच्ची के साथ गैंगरेप होता है। उसका गला दबाकर हत्या करने की कोशिश होती है। वो नहीं मरती तो तेजाब डालकर उसे कुएं में फेंक दिया जाता है। इस घटना से मानवता शर्मसार हो गई। उन्होंने कहा कि एक निर्भयाकांड दिल्ली में हुआ था। सारा देश आक्रोश से उबल रहा था। ऐसी जाने कितनी निर्भया राजस्थान में हैं, लेकिन वो जो कहती थीं, लड़की हूं लड़ सकती हूं, वो कुछ दूर टाइगर देखने के लिए आ सकती हैं, लेकिन राजस्थान की बहनों के लिए लड़ना उनको गवारा नहीं है। वो सिलेक्टिव पॉलिटिक्स करने वाले लोग हैं।