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राजस्थान की जनता के सामने ये पुस्तक लाएगी 32 हजार करोड़ की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का ‘सच’

पूर्व न्यायधीश पानाचंद जैन ने किया पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का सच पुस्तक का विमोचन

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जयपुर।
किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट के द्वारा लिखी गई पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का सच पुस्तक का विमोचन रविवार को राजस्थान हाइकोर्ट के सतीश चंद सभागार में पूर्व न्यायधीश पानाचंद जैन ने किया। पुस्तक को लेकर अध्यक्ष रामपाल जाट ने बताया कि पुस्तक में उन सभी पत्रों,जल नियंत्रण मंडल की बैठकों के निर्णयों को शामिल किया है जो इस परियोजना को लेकर समय-समय पर लिए गए। पत्र और निर्णयों के अध्ययन से स्पष्ठ है कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के लिए मध्य प्रदेश से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी नहीं है। क्योंकि 3 जून 1999 व 25 अगस्त 2005 को अंतरराज्यीय जल नियंत्रण मंडल की बैठक में मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच यह स्पष्ठ कर दिया गया कि कोई भी राज्य स्वयं की भूमि पर जल भराव रख सकता है।
किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि राज्य स्वंय के कैचमेंट एरिया का पानी ले और अन्य राज्य के कैचमेंट से दस प्रतिशत से ज्यादा पानी नहीं ले। पुस्तक में यह भी बताया गया है कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना की 50 प्रतिशत तक जल निर्भरता की डीपीआर पूरी तरह से सही है। इसको 75 प्रतिशत की निर्भरता पर संशोधित कराने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। विमोचन कार्यक्रम में पूर्व आइएएस जसराम,पूर्व जिला जर्ज किशन गुर्जर,खंडार प्रधान नरेन्द्र चौधरी समेत अन्य गणमान्य लोग व किसान मौजूद थे।
पुस्तक के बारे में बताते हुए किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि केन्द्र हो या राज्य, दोनों को ही राजस्थान के 13 जिलों के लिए भगीरथ बनने वाली पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को धरातल पर उतारने की कवायद करनी चाहिए। जिससे राजस्थान में किसानों को सिचाई के लिए और लोगों के लिए पीने का पानी उपलब्ध हो।