
आयुर्वेदिक आहार को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान और आयुष मंत्रालय ने जयपुर के जवाहर कला केंद्र में तीन दिवसीय आयुष एक्सपो और खाद्य महोत्सव की शुरुआत की। आयुष मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग का कहना है कि आयुर्वेद सिर्फ उपचार की पद्धति नहीं है, बल्कि यह तो एक सदियों पुरानी परंपरा है, जिसका हम सभी ने किसी न किसी रूप में पालन किया है। हालांकि, समय के साथ-साथ इसका महत्व कम होता दिख रहा है- खासकर आज के युवाओं के बीच, लेकिन इससे आयुर्वेद की उपयोगिता समाप्त नहीं हो जाती। उन्होंने कहा, हमे कक्षा 6 से 12वीं तक के बच्चों के दैनिक जीवन में स्वस्थ खाने की आदतों को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेदिक आहार को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। आयुष मंत्रालय को ग्रामीण स्कूलों में 6 से 9वीं कक्षा तक की लड़कियों के लिए स्वस्थ और पोषणयुक्त आहार को शामिल करने का बीड़ा उठाना चाहिए ताकि उनमें खून की कमी से संबंधित अंतहीन चुनौती का समाधान किया जा सके। सांसद रामचरण बोहरा ने कहा, आयुर्वेद मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने इस एक्सपो और फूड फेस्टिवल के माध्यम से खान-पान की स्वस्थ आदतों और आयुर्वेद के महत्व को प्रदर्शित किया है। निश्चित तौर पर बड़ी संख्या में लोग इससे लाभान्वित होंगे।
शेफ पंकज भदौरिया ने कहा, ‘आयुर्वेद आधुनिक समाज और पूरी दुनिया के लिए भारत का एक अनूठा उपहार है। हमें अपनी युवा पीढ़ी को स्वस्थ बनाने और उन्हें अपने दैनिक जीवन के अनुकूल बनाने के लिए आयुर्वेद में उल्लेखित खान-पान की आदतों पर गर्व करना चाहिए और उन्हें अपनाना चाहिए। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि जैसा खाएं अन्न, वैसा रहे मन। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि हम सभी लोगों को आयुर्वेद को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए। आयुष एक्सपो का उद्देश्य आयुर्वेद को बढ़ावा देना और कुपोषण से लड़ने में आयुर्वेद की भूमिका, आयुर्वेद आधारित स्टार्टअप के लिए अवसरों को बढ़ावा देने के साथ आयुर्वेद को सभी के लिए सुलभ बनाना है।
Published on:
11 Mar 2022 05:55 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
