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जयपुर. सवाई मानसिंह अस्पताल में कोरोना का बहाना बनाकर बंद की गई भर्ती मरीजों को बेड पर दवा पहुंचाने की व्यवस्था फिर से शुरू नहीं हो पाई है। इसके कारण मरीज व उनके परिजन दवाओं के लिए भटकने को मजबूर हैं।
वहीं, वार्डों के बाहर लपकागिरी भी बढ़ रही है। अस्पताल प्रशासन इससे अनजान बना हुआ है। जानकारी के अनुसार सितंबर 2018 में तत्कालीन अधीक्षक ने भर्ती मरीजों को दवाओं के लिए परेशानी न हो, इसके लिए बेड पर ही दवा पहुंचाने के लिए ‘ड्रग्स डिलीवरी ऑन द बेड’ योजना शुरू की थी। इस नई व्यवस्था के तहत डॉक्टर की पर्ची को वार्ड में तैनात नर्सिंग कर्मी एकत्र करके वार्ड बॉय के माध्यम से दवा वितरण केंद्र तक पहुंचाता था। जहां से फार्मासिस्ट उन दवाओं को मरीजों के बेड तक पहुंचा देता था। अब मरीज के परिजन को दवाओं के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है।
अकेले व असहाय मरीजों को भारी परेशानी
कुछ मरीज असहाय होते हैं। कई मरीज दुर्घटना व अचानक बीमार होने केे कारण अकेले ही अस्पताल में लाए जाते हैं। इन मरीजों को उपचार के लिए भर्ती कर लिया जाता है। ऐसे मरीजों को दवाओं के लिए परेशानी हो रही है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ज्यादातर वार्डों के बाहर दवा वितरण काउंटर खोले जा चुके हैं। जल्द ही और खोले जाएंगे।
रोगियों से वसूल रहे मनमाफिक दाम
अस्पताल प्रशासन की अनदेखी का फायदा लपके उठा रहे हैं। ये लोग वार्डों, आईसीयू और ओटी के बाहर घूमते नजर आते हैं। जो दवा वितरण केंद्र पर नहीं मिलती है वो पर्ची तुरंत मरीज व उसके परिजन के हाथ से लपक लेते हैं और उसे वार्ड में निजी मेडिकल स्टोर से दवा लाकर देते हैं। इसके लिए मरीजों से मनमाफिक दाम वसूलते हैं।
Published on:
12 Nov 2023 10:29 am
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