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राजस्थान में सरकारी स्कूलों में उप प्रधानाचार्य की जगह सरकार की ओर से वरिष्ठ व्याख्याता का पद सृजन बेरोजगार अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर चोट करने वाला बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस पद की वजह से बेरोजगारों के लिए सीधी भर्ती के पद कम होंगे। क्योंकि स्कूलों में व्याख्याताओं के वर्तमान पदों में से ही एक पद वरिष्ठ व्याख्याता का होगा, जिसे पदोन्नति से ही भरा जाएगा। ऐसे में सीधी भर्ती से भरे जाने वाले व्याख्याताओं का एक पद पदोन्नति से भरने से पद कम हो जाएंगे।
सरकार स्कूलों में वरिष्ठ व्याख्याता के जितने पद घोषित करेगी, सीधी भर्ती के लिए उससे आधे पद कम हो जाएंगे। क्योंकि वर्तमान में व्याख्याताओं के आधे पद सीधी भर्ती व आधे पद पदोन्नति से भरे जाने का नियम है। मामले के जानकारों का कहना है कि लिहाजा उसी में से एक वरिष्ठ व्याख्याता का पद निकालकर उसे शत प्रतिशत पदोन्नति से भरने पर सीधी भर्ती के 50 फीसदी पद कम हो जाएंगे।
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वरिष्ठ व्याख्याताओं के पदों को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। क्योंकि उप प्रधानाचार्य का पद डाइंग कैडर में डालते हुए सरकार ने इन पदों का सृजन किया है। ऐसे में ये साफ नहीं हुआ है कि ये पद उप प्रधानाचार्यों वाले 12 हजार 404 स्कूलों में ही सृजित होंगे या सभी 18500 सीनियर सैकंडरी स्कूलों को मिलेंगे। यदि सभी स्कूलों में वरिष्ठ व्याख्याता हुए तो सीधी भर्ती के करीब 9200 पद कम हो जाएंगे।
सरकार ने साफ नहीं किया है कि वरिष्ठ व्याख्याता के सभी पद केवल उप प्रधानाचार्य वाले स्कूलों को ही मिलेंगे या सभी सीनियर सैकंडरी स्कूलों को, लेकिन ये तय है कि पदोन्नति से भरने से वरिष्ठ व्याख्याताओं की संख्या से आधे पद सीधी भर्ती के लिए कम हो जाएंगे। इससे बेरोजगार युवाओं को नुकसान होगा।
उपेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत
बढ़ती बेरोजगारी के बीच सीधी भर्ती के पद कम करने वाला सरकार का कदम युवा विरोधी है। इससे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को हितों पर कुठाराघात होगा। इसके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
भरत बेनीवाल, अध्यक्ष, राजस्थान बेरोजगार संघ
Updated on:
20 Apr 2025 06:27 pm
Published on:
20 Apr 2025 06:21 pm
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