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दीपोत्सव विशेष : राजस्थान में लक्ष्मीजी के गिने-चुने मंदिर, हर साल दीपावली पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं

भीलवाड़ा शहर के विजयसिंह पथिकनगर में लक्ष्मीजी का इकलौता मंदिर है। अग्रवाल भवन के मंदिर में लक्ष्मीजी की अष्टधातु की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति का निर्माण ग्वालियर के कारीगरों ने किया। अष्टधातु की प्रतिमा का पौराणिक व वैज्ञानिक महत्व है। देश में ऐसे गिने-चुने मंदिर हैं, जहां देवी लक्ष्मी दो स्वरूपों में विराजमान हैं। रावतभाटा रोड पर रामधाम आश्रम मंदिर में देवी की दो प्रतिमाएं हैं।

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Laxmi Temples In Rajasthan

Laxmi Temples In Rajasthan

भीलवाड़ा में एक मात्र लक्ष्मीजी का मंदिर, यहां 325 किलो वजनी अष्टधातु की मूर्ति
Laxmi Temples In Rajasthan : शहर के विजयसिंह पथिकनगर में लक्ष्मीजी का इकलौता मंदिर है। अग्रवाल भवन के मंदिर में लक्ष्मीजी की अष्टधातु की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति का निर्माण ग्वालियर के कारीगरों ने किया। अष्टधातु की प्रतिमा का पौराणिक व वैज्ञानिक महत्व है। प्रतिमा का वजन 325 किलो है। इसमें मुख्य रूप से पीतल व तांबा का इस्तेमाल हुआ है। सोना, चांदी, सीसा, जस्ता, टिन व पारे का भी पौराणिक मान्यता अनुसार निश्चित अनुपात में मिश्रण है। प्रतिमा का स्वरूप दिव्य, प्रभावी, आकर्षक व चमत्कारिक है। अग्रवाल समाज लक्ष्मीजी को कुल देवी के रूप में पूजता है। हर साल लाभ पंचमी के दिन शाम को महालक्ष्मी दर्शन लाभ मेला लगता है।

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कोटा : रामधाम आश्रम पर तीन दशक पहले हुई थी स्थापना
कोटा. देश में ऐसे गिने-चुने मंदिर हैं, जहां देवी लक्ष्मी दो स्वरूपों में विराजमान हैं। रावतभाटा रोड पर रामधाम आश्रम मंदिर में देवी की दो प्रतिमाएं हैं। एक प्रतिमा कमल पर तो दूसरी नारायण यानी श्रीहरि के साथ विराजमान है। पुजारी संत लक्ष्मणदास बताते हैं कि बड़े भक्तमाल पीठ के संत अवधेश कुमाराचार्य ने मंदिर की स्थापना के समय देवी लक्ष्मी की प्रतिमा की स्थापना करवाई। बाद में लक्ष्मीनारायण को अन्य विग्रहों के साथ स्थापित करवाया गया। इनके अलावा परिसर में भगवान सत्यनारायण का प्राचीन प्रतिमा भी है। तीन दशक पहले आश्रम की स्थापना की गई थी।