
इंटरनेट का अनुभव कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है डेटा सेंटर
दुनिया के लिए डेटा फैक्टरी यानी डेटा सेंटर, इंटरनेट का अनुभव कराने में महतत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। इसके बिना व्हाट्सएप संदेश नहीं भेजे जा सकते या यूपीआई लेनदेन शुरू नहीं किया जा सकता है। नेटफ्लिक्स पर अपना पसंदीदा शो नहीं देख पाएंगे। जब हम अपने स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग करके स्टॉक में व्यापार करते हैं, बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बनाते हैं, सामान खरीदते है या किसी ऑनलाइन शापिंग करते है, तो इन विशाल कंप्यूटिंग पावरहाउस के माध्यम से स्टोर, प्रोसेस और मैनेज किया जाता है। डेटा सेंटर ऐसी जगह होती है, जहां किसी कंपनी की आईटी एक्टिविटी और डिवाइस को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। इन सुविधाओं में डेटा स्टोरेज, इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग और कंपनी के एप्लिकेशन से जुड़े कई कामकाज शामिल हैं।
डेटा सेंटर करते है भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत
भारत का उद्योग जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ऊर्जा की मांग भी बढ़ती जा रही है। चूंकि डेटा सेंटर भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत करते हैं, इसलिए बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने की तत्काल आवश्यकता है। भविष्य को ध्यान में रखते हुए अदाणी समूह ने अदाणी कनेक्स डेटा सेंटर बिजनेस की शुरुआत की है। यह अदाणी एंटरप्राइजेज और एजकॉनेक्स के 50-50 फीसदी निवेश का संयुक्त उद्यम है। हाइपरस्केल डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में एजकॉनेक्स की वैश्विक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए, अदाणी कनेक्स देशभर में 1 गीगावॉट डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म बनाने के मिशन पर है।
भारत के सात शहरों में डेटा सेंटर की क्षमता 819 मेगावाट
सीआईआई-कोलियर्स की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2023 तक भारत के शीर्ष सात शहरों में डेटा सेंटर की क्षमता 819 मेगावाट है, जो 11.0 मिलियन वर्ग फीट में फैला हुआ है। जैसे ही, डेटा स्थानीयकरण एक आदर्श बन जाता है, भारत के बाजार में तेजी से विकास देखने की संभावना है, जिससे अगले दो से तीन सालों में इस क्षेत्र में डवलपर्स और ऑपरेटरों के लिए बड़े अवसर खुलेंगे। साथ ही, जगह की उपलब्धता, अंडरवाटर केबल के माध्यम से स्थापित वैश्विक कनेक्टिविटी, तुलनात्मक रूप से कम जमीन और बिजली की लागत और बढ़ती मांग डेटा सेंटर ऑपरेटरों को भारत का पता लगाने के लिए प्रेरित करेगी, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र का तेजी से विकास होगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई सबसे विकसित डेटा सेंटर हब है, जो देश की आधे डेटा सेंटर क्षमता की मेजबानी करता है। मैक्सिमम सिटी बीजिंग, शंघाई, टोक्यो और सिडनी के साथ शीर्ष 5 एशिया पैसिफिक के बाजारों में भी शामिल है। जबकि, चेन्नई, बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर पहले से ही अपेक्षाकृत स्थापित बाजार हैं। पूर्वी भारत के लिए जोनल डेटा सेंटर हब होने की कोलकाता की क्षमता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
भारत के सात शहरों में डेटा सेंटर की क्षमता 819 मेगावाट
अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के मुताबिक, दुनिया डेटा उत्पन्न करने, संग्रहीत करने, उपयोग करने और स्थानांतरित करने की हमारी क्षमता से परिभाषित हो रही है। एआई, हाई-डेफिनिशन सामग्री और बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण में प्रगति के साथ, गणना और भंडारण की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। रिन्यूएबल एनर्जी के लिए भूमि के भौगोलिक लाभ और लंबी तटरेखा के साथ, भारत न केवल हमारे लिए बल्कि उन देशों के लिए भी डेटा सेंटर पार्क की मेजबानी करने के लिए अच्छी स्थिति में है, जिनके पास भूमि या ऊर्जा की कमी है। आईटी के क्षेत्र में भारत का बड़ा रोल है। दुनिया की सभी बड़ी कंपनियां यहां अपना सेंटर चलाती हैं। भारत में तेजी से ऑनलाइन और कंप्यूटर आधारित उद्योग धंधे बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए डाटा का स्टोरेज महत्वपूर्ण काम है। डाटा सेंटर कैंपस बनने से उद्योग या आईटी कंपनियों को फायदा होगा और वे स्टोरेज की सुविधा ले सकेंगे। आने वाले समय में इसमें और तेजी देखी जाएगी।
क्या होता है डेटा सेंटर
डेटा सेंटर ऐसी जगह होती है, जहां किसी कंपनी की आईटी गतिविधियों और उपकरणों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। इन सुविधाओं में डेटा स्टोरेज, सूचनाओं की प्रोसेसिंग और दूसरे स्थान पर उसे पहुंचाना और कंपनी के एप्लिकेशन से जुड़े कामकाज शामिल हैं। इसे किसी सर्वर की तरह मान सकते हैं जहां से किसी कंपनी का पूरा आईटी ऑपरेट होता है। डिजिटल प्रौद्योगिकियां, जो आधी सदी से भी अधिक समय से मौजूद हैं, अब इसके सामर्थ्य और उपलब्धता को देखते हुए इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा हैं, जिससे डेटा की बाढ़ आ गई है और उसे किसी स्थान पर संग्रहीत करने की आवश्यकता है। क्लाउड अनुकूलन और डिजिटलीकरण की इस लहर पर सवार होकर, भारत में हाल के दिनों में डेटा केंद्रों में बड़े पैमाने पर वृद्धि देखी जा सकती है।
Published on:
09 Nov 2023 10:33 pm
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