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रमजान में लाउडस्पीकर पर विवाद: बीजेपी MLA ने डोटासरा पर लगाया हत्या के षड्यंत्र का आरोप; क्या सरकार लाएगी कानून?

राजस्थान में रमजान के महीने में भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने लाउडस्पीकर को लेकर बयान देकर प्रदेश का सियासत पारा बढ़ा दिया है।

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गोविंद सिंह डोटासरा और विधायक बालमुकुंदाचार्य

Controversy over loudspeakers in Rajasthan: राजस्थान में भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने रमजान के महीने में लाउडस्पीकर को लेकर बयान देकर प्रदेश की सियासत में गर्मी पैदा कर दी है। इस मामले पर पक्ष और विपक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमलावर हैं। हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने डोटासरा के बयान पर पटलवार करते हुए कहा है कि 'पेपरलीक माफिया गोविंद सिंह डोटासरा ने या तो मेरी कहीं सुपारी दे दी है या उन्होंने किसी को मुझे मारने के लिए उकसाया है। उन्हें कैसे पता कि मेरी जान को खतरा है?'

गौरतलब है कि बालमुकुंदाचार्य ने 'अजान के लिए लाउडस्पीकरों की आवाज नियंत्रित करने के लिए पुलिस से निवेदन किया था। उन्होंने कहा था कि तेज आवाज से कई लोगों को सिरदर्द और ‘माइग्रेन' की समस्या होती है। जिस पर डोटासरा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि 'उनकी सुरक्षा बढ़ा देनी चाहिए, क्योंकि जो हरकतें वो कर रहे हैं पता नहीं कब, किसका, क्या दिमाग फिर जाए।'

कांग्रेस भारत की संस्कृति और धर्म विरोधी- बालमुकुंदचार्य

हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने बुधवार को विधानसभा के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि 'डोटासरा को भारतीय संस्कृति, धर्म और संतों से मन में द्वेष है। वो इस तरह की हरकतें करके बताना चाहते है कि कांग्रेस की रीति-नीति, सोच और स्वभाव हमेशा भारत की संस्कृति और धर्म के विरोधी है, इसलिए ही उन्होंने ऐसा कहा है'।

'डोटासरा ने मारने की कोई योजना बनाई हो'- बालमुकुंदचार्य

उन्होंने आगे कहा कि 'डोटासरा ने मुझ पर हमला करने के लिए किसी को एक्टिव किया है या उन्होंने कोई षड्यंत्र रचा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्होंने मारने की कोई योजना बनाई हो। कल को कुछ भी होता है तो मैं मानता हूं कि डोटासरा ने ही कोई योजना बनाई है। मेरे पर दुर्घटना की आशंका बताई है, उसके जिम्मेदार वो होंगे। डोटासरा अपने बयानों से खुद को चर्चित बता रहे है, लेकिन सबको पता है जूली जिस तरह से फ्रंट पर खेल रहे है। उससे उनका कद बढ़ा है, कांग्रेस में उनका मान-सम्मान कद बढ़ा है। जिससे डोटासरा बोखलाहट या कोई मानसिक समस्या होने से ऐसे शब्द बोलकर माहौल बनाने का प्रयास कर रहे है'।

यह भी पढ़ें : MLA बालमुकुंदाचार्य की मांग- 5 टाइम का लाउडस्पीकर बंद हो, डोटासरा का पलटवार; बोले- ऐसे ‘नमूने’ सदन में आ गए

कब, किसका, क्या दिमाग फिर जाए- डोटासरा

इससे पहले पीसीसी चीफ डोटासरा ने बालमुकुंदाचार्य के उदयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा था कि 'ऐसे नमूने विधानसभा में आ गए हैं, उन्हें जनता ने अपनी समस्याओं के लिए चुना है। लेकिन वे हिंदू-मुस्लिम करके नफरत फैला रहे है। उनके इस बयान के बाद भगवान करे वे सुरक्षित रहें। उनकी सुरक्षा भी बढ़ा देनी चाहिए, क्योंकि जो हरकतें वो कर रहे हैं पता नहीं कब, किसका, क्या दिमाग फिर जाए।'

लाउडस्पीकर पर सख्त कानून लाने में संकोच नहीं- मंत्री

जबकि बालमुकुंदाचार्य के लाउडस्पीकर को लेकर दिए बयान का संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि राजस्थान भी उन राज्यों के साथ है, जहां कानून की पालना होनी चाहिए। सभी धर्मालंबियों को अपने-अपने धर्म के अनुसार पूजा पद्धति करने का अधिकार हैं। लेकिन उनकी पद्धति से किसी अन्य को परेशानी ना हो, उनकी नींद बाधित न हो और अमन शांति को कोई खतरा न हो, इसका ध्यान रखना होगा। यदि आवश्यकता हुई तो राजस्थान सरकार भी लाउडस्पीकर को लेकर सख्त कानून लाने में भी संकोच नहीं करेगी।

डिप्टी CM ने जताया ऐतराज

वहीं, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने बालमुकुंदाचार्य के बयान पर ऐतराज जताया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था कि 'वो कुछ भी बोलें, लेकिन हम इस तरह से अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करते। हम संस्कार और संस्कृति से रहने वाले लोग हैं।'

कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद

राजस्थान में लाउडस्पीकर विवाद की शुरुआत भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य के बयान के साथ हुई। उन्होंने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा था कि 'अजान के लिए लाउडस्पीकरों की आवाज नियंत्रित करने की जरूरत है। तेज आवाज से कई लोगों को सिरदर्द और ‘माइग्रेन' की समस्या होती है तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।'

साथ ही उन्होंने कहा कि 'रमजान में जानबूझकर लाउडस्पीकरों की आवाज बढ़ा दी जाती है। कुछ लोगों ने अपने घरों में ही लाउडस्पीकर लगा लिए हैं। हमने दो-चार जगहों पर निवेदन किया है कि घर पर लाउडस्पीकर नहीं लगाएं। इस पर पुलिस प्रशासन को निगरानी रखनी चाहिए और उसे नियंत्रित करना चाहिए। पुलिस प्रशासन जांच करे कि आवाज कितनी होनी चाहिए और कितनी आवाज फिलहाल है। उस आवाज की जांच करने के लिए पुलिस प्रशासन से निवेदन करूंगा कि वे मामले की जांच करें।'