
Congress MLA Amin Khan
जयपुर। 15 विधानसभा में आज बजट सत्र के दौरान बजट पर बोलते हुए सत्तापक्ष के विधायक अमीन खान का दर्द छलक गया। शिव से कांग्रेस विधायक अमीन खान ने बजट पर बहस में हिस्सा लेते हुए अपनी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और मुस्लिम मतदाताओं की अनदेखी के आरोप लगाए।
अमीन खान ने कहा कि मुसलमान कमजोर वर्ग से आते हैं और सब जानते हैं कि 95 फ़ीसदी पोलिंग करते हैं, जिसमें से 99 फीसदी पोलिंग कांग्रेस के पक्ष में होती है लेकिन उस हिसाब से हमें सरकार में हिस्सेदारी नहीं मिलती है।
खान ने कहा कि कांग्रेस इस गलतफहमी में नहीं रहे की मुसलमान कांग्रेस को छोड़कर कहीं नहीं जाएगा। अगर इसी गलतफहमी में रहोगे तो चोट खाओगे क्योंकि मुसलमान अब जागरुक हो चुका है पहले गांव में मुसलमान अनजान थे लेकिन अब सब कुछ जानते और समझते हैं।
मुस्लिम मंत्रियों के पास काम के विभाग नहीं
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक ने गहलोत मंत्रिमंडल पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एससी वर्ग से 4 कैबिनेट बनाए गए हैं, जबकि हमारा एक कैबिनेट मिनिस्टर साले मोहम्मद है और उसके पास कब्रो का काम है, जिसका मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं है और जाहिदा के पास गवर्नमेंट प्रेस का काम है जिनसे हमें कोई किताबें नहीं छपवानी। जबकि पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे की सरकार में यूनिस खान केवल एकमात्र मुस्लिम मंत्री था लेकिन उसके पास दो महत्वपूर्ण विभाग थे जबकि हर कोई जानता है कि यूनुस खान तबलीगी जमात का आदमी है पक्का मुसलमान है।
मैंने दो आवासीय विद्यालय मांगे, नहीं मिले
वरिष्ठ विधायक अमीन खान ने कहा कि मैं पांचवी बार का विधायक हूं। मैंने अपने विधानसभा क्षेत्र में 2 आवासीय विद्यालयों की मांग की थी लेकिन मेरी मांग को अनसुना कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पूरे बाड़मेर जिले में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पीछे रही थी लेकिन मेरे शिव विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस आगे रही। पूरा वोट कांग्रेस को मिलता है बावजूद इसके बजट में सड़कों के नाम पर मेरे क्षेत्र में 1 इंच सड़क की घोषणा नहीं की गई है।
उर्दू पाकिस्तान के बाप की भाषा नहीं
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अमीन खान ने सरकार पर उर्दू की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि आज उर्दू पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उर्दू के शिक्षक नहीं लगाए जा रहे हैं, उन्होंने कहा कि उर्दू कोई पाकिस्तान के बाप की भाषा नहीं है। उर्दू हिंदुस्तानी जबान हैं और केवल मुसलमानों की नहीं बल्कि सभी भारतीयों की जबान है। आज भी जिला हेडक्वार्टर में जब अलग से थाने बनाए जाते हैं तो उन्हें सदर थाना कहा जाता है।
सदर शब्द हिंदी और संस्कृत का नहीं बल्कि उर्दू का शब्द है।वहीं पुलिस की जांच में भी कई शब्द ऐसे जो उर्दू में होते हैं। इसका मतलब है कि उर्दू मोहब्बत और अदब वाली भाषा है। अमीन खान ने कहा कि राजस्थान में गांव शहरों में हजारों मदरसे हैं इन मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को उर्दू की शिक्षा नहीं दी जा रही है।
Updated on:
24 Feb 2022 08:46 pm
Published on:
24 Feb 2022 08:36 pm
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