
बिना विद्युत खर्च 800 रुपए का स्थाई शुल्क जनता की कमर तोड़ेगा
जयपुर।
उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। राठौड़ ने कहा कि जयपुर, जोधपुर व अजमेर डिस्कॉम की टैरिफ याचिका पर सुनवाई करते हुए घरेलू उपभोक्ताओं से कनेक्शन लोड यानी बिना बिजली जलाए ही 800 रुपए प्रतिमाह तक स्थायी शुल्क लगाया है। राजस्थान में बिजली दर (टैरिफ) 8.13 पैसे प्रति यूनिट है जो पड़ोसी राज्यों उत्तरप्रदेश व हरियाणा में क्रमशः 6.76 पैसे प्रति यूनिट और 5.65 पैसे प्रति यूनिट से काफी ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में जल संरक्षण उपकर/फ्यूल सरचार्ज के नाम पर 49 पैसे प्रति यूनिट और शहरी सेस के नाम पर 15 पैसे प्रति यूनिट आम उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में विद्युत शुल्क के नाम पर 40 पैसे प्रति यूनिट और अडानी कर के नाम पर 5 पैसे प्रति यूनिट वसूलने का जनविरोधी कार्य भी कांग्रेस सरकार द्वारा किया जा रहा है। सरकार पहले से ही प्रदेश के सभी श्रेणी घरेलू, अघरेलू, वाणिज्यिक व औद्योगिक उपभोक्ताओं से 250 रुपये प्रतिमाह से लेकर 25000 रुपए प्रतिमाह फिक्स चार्ज वसूल रही है। वहीं अब नए प्रस्ताव के माध्यम से राज्य सरकार घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार लादने की तैयारी में है जिसके तहत वर्तमान में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे 275 रुपये से 400 रुपये प्रतिमाह फिक्स चार्ज को बढ़ाकर 800 रुपए प्रतिमाह तक कर दिया गया है।
बिजली कंपनियों का दस हजार करोड़ का घाटा जनता के माथे क्यों
विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधानसभा चुनावों में बिजली की दरें नहीं बढ़ाने का वादा करने वाली कांग्रेस अब प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं से कनेक्शन लोड के हिसाब से स्थायी शुल्क लेने को आमादा है। बिजली कंपनियों का दस हजार करोड़ का घाटे की भरपाई करने का भार भोली-भाली जनता के सिरमाथे डालना जनता का जीतेजी गला घोंटने जैसा है। बिजली एक दिन भी न जलाने पर हर माह 800 रुपए स्थायी शुल्क लेकर जनता पर बेवजह का बोझ डाला जा रहा है। ढाई साल में ढाई प्रतिशत वादे भी सरकार पूरा करने में असफल रही है।
Published on:
02 Aug 2021 09:38 pm
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