
जयपुर। जनगणना का नाम आते ही जहन में आबादी, नल-बिजली-बैंकिंग-इंटरनेट के इस्तेमाल जैसे सवाल घूमने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो पिछले दशक खासकर कोविडकाल के बाद जीवन में आए बदलाव को जानने के लिए ऐसे प्रश्न काफी नहीं हैं। अब इंतजार है...क्या अगली जनगणना में नई तकनीक का इस्तेमाल होने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, खान-पान, आर्थिक व तकनीकी समृद्धि तथा युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े जरूरी सवालों को भी जगह मिलेगी।
जनगणना की तारीख भले तय नहीं हो, लेकिन इसके सवालों पर मंथन जारी है। एआई के बढ़ते उपयोग के बीच होने वाली अगली जनगणना के नए पहलुओं के बारे में पड़ताल की गई, तो सामने आया अब राजस्थान जैसे प्रदेशों में परिवार और व्यक्तियों के बारे में पूछे जाते रहे सवाल अब उतने प्रासंगिक नहीं हैं। सरकार का जनाधार के लिए 95 प्रतिशत परिवारों के पंजीकृत होने का दावा है, ऐसे में परिवारों के बारेे में काफी बेसिक जानकारी सरकार के पास पहले से ही उपलब्ध है। घर में इस्तेमाल ईंधन, पानी के लिए नल, बैंक में खाता, इंटरनेट का इस्तेमाल जैसे सवाल भी अब पहले जितने उपयोगी नहीं रहे हैं।
जनाधार पंजीयन के अनुसार....प्रदेश में 1 करोड़ 98 लाख 82 हजार 340 परिवार पंजीकृत, जिनमें 7 करोड़ 75 लाख 86 हजार 31 सदस्य हैं।
क्यों बदले जनगणना का पैटर्न
- अब जल जीवन मिशन के जरिए हर घर तक नल पहुंचाने का लक्ष्य हैं। ऐसे में कितने लोग नल का इस्तेमाल करते हैं, यह सवाल बेकार है।
- स्वच्छता अभियान में घर-घर शौचालय बनाने का लक्ष्य है, ऐसे में घर में शौचालय होने का सवाल क्यों?
- डीबीटी के कारण लगभग हर परिवार और अधिकांश सदस्यों का बैंक में खाता है, ऐसे में बैंक में खाता खुला है या नहीं, इस सवाल की उपयोगिता पर विचार हो।
- सरकार का हर गांव को बिजली और सड़क से जोड़ने का लक्ष्य है, ऐसे में इनके बारे में सवाल भी अब जरूरी नहीं रहे।
नए सवाल जुड़ें, क्योंकि....
- मोबाइल के इस्तेमाल संबंधी सवाल, ताकि पता चल सके सोशल मीडिया पर कितनी व्यस्तता है?
- वाहन कैसा, ताकि पता चल सके ईवी का इस्तेमाल कितना बढ़ा?
- मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी, ताकि आत्महत्या रोकने के योजना बनाई जा सके
- टाॅयलेट का सीवर से जुड़ाव, ताकि पता चल सके भूजल कहां-कहां और कितना दूषित हो रहा है?
Published on:
29 Jun 2023 01:14 am
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