इस दौरान उन्होंने ताड़का वध और राम विवाह की लीला का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान राम जब विश्वामित्र के साथ अयोध्या से वन के लिए गए। इस दौरान उन्होंने ताड़का का वध किया। उससे पहले ताड़का ने श्रीराम के सामने कई महिमा मंडन किए। देवता तो कई है लेकिन राम जैसा कोई नहीं। राम जैसा काई राजा, त्यागी, स्वामी, दानी नहीं है। लक्ष्मण परशुराम संवाद, सीता राम जी के विवाह का प्रसंग सुनाया। भजन राजे भी देखे महाराजे भी देखे मेरे राम जैसा कोई राजा न देखा.. पेश किया। कार्यक्रम संयोजक राजन शर्मा और आयोजन समिति के सचिव अनिल संत ने बताया कि कथा के बाद भजन संध्या का आयोजन हुआ। भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा समेत मुंबई और कोलकाता के गायकों ने भजनों की प्रस्तुतियां दी।
गोशाला संस्थान के अध्यक्ष रवि शंकर पुजारी, मुकेश गोयल, आलोक अग्रवाल, सुखलाल जैसनसरिया, अवंत जैन, रामावतार खंडेलवाल, संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल, आरएएस पंकज ओझा, पंकज गोयल, जगदीश चौधरी, राजेश शर्मा, गोपेश शर्मा सहित अन्य ने आरती की।