
सड़क दुर्घटना कानून में बदलाव के विरोध में कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी
विधानसभा चुनाव के बाद अब अगला मिशन लोकसभा चुनाव का है लेकिन कांग्रेस के जयपुर शहर और देहात के अध्यक्ष न तो चुनाव से पहले और न ही बाद में अपनी टीम यानी कार्यकारिणी बना सके। दोनों ही अध्यक्षों को पार्टी ने विधानसभा चुनाव भी लड़वाया था लेकिन हार गए। इनमें एक तो विधायक भी थे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विधानसभा चुनाव से करीब छह माह पहले जयपुर शहर में आर आर तिवाड़ी और देहात में गोपाल मीणा को अध्यक्ष बनाया था। उस वक्त दोनों अध्यक्षों को कार्यकारिणी बनाने के निर्देश दिए थे और उसमें पदाधिकारियों की संख्या भी 72 तक सीमित रखने को कहा था। तब दोनों अध्यक्षों का तर्क था कि उन्हें ज्यादा पदाधिकारी बनाने की छूट दी जाए क्योंकि राजधानी का मसला है। पहले तो डोटासरा ने उन्हें मना कर दिया और कहा कि एक बार कार्यकारिणी की सूची तो प्रदेश कांग्रेस को भेजें। तब तक विधानसभा चुनाव आ गए और कार्यकारिणी नहीं आ सकी। ऐसे में संगठन के पदाधिकारी नहीें बनने से चुनाव में उनकी कमी भी खली और संगठन चुस्त- दुरुस्त होकर काम नहीं कर सका।
पूर्व अध्यक्ष की टीम उनके क्षेत्र में ही रही सक्रिय
शहर के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह खाचरियावास की कार्यकारिणी के ज्यादातर पदाधिकारी सिविल लाइंस सीट पर ही सक्रिय रहे और शहर की बाकी सीटों पर उनका फोकस नहीं रहा। ऐसे में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।
जिले में 7 सीटें मिली कांग्रेस को
जयपुर जिले में कांग्रेस को 19 में से सात सीटों पर जीत मिली थी। इसमें शहर में किशनपोल और आदर्शनगर सीट जीते वहीं ग्रामीण में शाहपुरा, चौमूं, फुलेरा, बस्सी और आमेर में चुनाव जीते। जबकि पिछली बार ये आंकड़ा 10 सीटों का था और उसमें भी शहर से तो पांच सीटें थीं। अब पार्टी अपना रेकॉर्ड बरकरार नहीं रख पाई।
Published on:
14 Dec 2023 07:30 pm
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