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Rajasthan Monsoon 2026: राजस्थान में मानसून की एंट्र्री को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए कहां अटका हुआ है

Rajasthan Monsoon 2026: राजस्थान में मानसून के आगमन से पहले इस बार रेत के बवंडर और आंधियां सामान्य से अधिक देखने को मिल रही हैं। जानिए इसका कारण-

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Rajasthan Rain

राजस्थान में बारिश की फाइल फोटो (पत्रिका)

Rajasthan Monsoon Update: जयपुर । राजस्थान में मानसून के आगमन का हर किसी को इंतजार है। मौसम विभाग ने प्रदेश के बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा व जोधपुर संभाग के कुछ भागों में अगले 2 से 3 दिन कहीं-कहीं बारिश और आंधी चलने की संभावना जताई गई है। कुछ जगह 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में मानसून 8 दिन से अटका हुआ है। इस वजह से बारिश में काफी देरी हो रही है। असामान्य जेट स्ट्रीम हवाओं ने इस बार मानसून को काफी प्रभावित कर दिया है। राजस्थान में जून में अंतिम सप्ताह में मानसून के प्रवेश करने की संभावना है।

इस बार राजस्थान में रेत के बवंडर और आंधियां सामान्य से अधिक देखने को मिल रही हैं। लगातार उठ रहे रेत के बवंडरों से कई जिलों में दिन के समय भी अंधेरे जैसी स्थिति बन रही है। फलोदी में मंगलवार शाम अचानक मौसम के बदले तेवरों का सामना करना पड़ा। शाम करीब पौने सात बजे आसमान पर काले-पीले रंग की धूल की परत छा गई और देखते ही देखते पूरा शहर रेत के गर्द में समा गया। तेज धूलभरी आंधी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। कई स्थानों पर टीन शेड और छप्पर उड़ गए, बिजली आपूर्ति बाधित हो गई तथा सौर ऊर्जा उत्पादन भी पूरी तरह प्रभावित हुआ।

असामान्य सन्नाटे के बाद आया धूल का गुबार

गौरतलब है कि आंधी आने से पहले वातावरण में असामान्य सन्नाटा और भारी उमस महसूस की जा रही थी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति तेज संवहनीय गतिविधियों और तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव का संकेत मानी जाती है। शाम होते-होते अचानक उठे धूल के गुबार ने दृश्यता को काफी कम कर दिया और सड़कों पर वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।

रेत के धूलकण सांसों पर संकट

जानकारों की माने तो आंधी के दौरान हवा में बड़ी मात्रा में धूलकण घुल जाने से डस्ट पोल्यूशन का स्तर अचानक बढ़ गया। बाजारों, गलियों और आवासीय क्षेत्रों में धूल की मोटी परत जम गई। अस्थमा, एलर्जी और श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में कठिनाई और गले में खराश की शिकायत की।

जलवायु परिवर्तन का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी राजस्थान में लगातार बढ़ रही धूलभरी आंधियों की तीव्रता केवल मौसमी घटना नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव भी दिखाई देने लगे हैं। बढ़ते तापमान, भूमि की नमी में कमी और अनियमित मौसमी गतिविधियां ऐसे तूफानों को अधिक तीव्र बना रही हैं।

जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती

फलोदी सहित मरुस्थलीय क्षेत्रों में पहले भी आंधियां आती रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनके स्वरूप और आवृत्ति में बदलाव देखने को मिला है। कभी भीषण गर्मी, कभी उमसभरे हालात और फिर अचानक धूलभरे तूफान जैसी घटनाएं मौसम के असामान्य व्यवहार की ओर संकेत कर रही हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की चरम घटनाएं बढ़ रही हैं। जहां एक ओर तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं और धूलभरी आंधियों का प्रभाव भी बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा उत्पादन और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है।

सोलर हब में भी दिखा असर

सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले फलोदी क्षेत्र में धूलभरी आंधी का असर सोलर प्लांटों पर भी दिखाई दिया। धूल की घनी परत और कम दृश्यता के कारण सौर ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित रही, जिससे लोगों को गर्मी के बीच अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ी।