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फरसपाल पुल के इंतजार में अटका दंतेवाडा का महादेव परिक्रमा पथ

दंतेवाडा जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं लेकिन इस दिशा में अभी न तो सरकार की नजर पड़ी है और न ही प्रशासन गम्भीर नजर आता है ऐसा ही एक महादेव पर्यटन परिपथ है जिसको लेकर स्थानीय युवा काफी उत्साहित है उन्होंने ही इसकी पहल भी की है यदि इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी ।

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दंतेवाडा का महादेव पर्यटन  परिपथ

दंतेवाडा में प्रस्तावित महादेव पर्यटन परिपथ को मंजूरी का इंतजार

शैलेन्द्र ठाकुर
दंतेवाड़ा @ पत्रिका .महाशिवरात्रि में सप्ताह भर का समय बाकी है, लेकिन दंतेवाड़ा व गीदम ब्लॉक में महादेव परिक्रमा पथ नामक मिनी टूरिस्ट सर्किट की परिकल्पना इस बार भी साकार नहीं हो सकी है। दरअसल, फरसपाल-बिंजाम के बीच दंतेवाड़ा नदी पर प्रस्तावित पुल का निर्माण कार्य मुख्यमंत्री की घोषणा के 3 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। इस पुल के बनने पर महाशिवरात्रि व सावन सोमवार जैसे खास अवसरों पर श्रद्धालुओं को एक ही फेरे में बारसूर के ऐतिहासिक शिवालयों, विश्वनाथ मंदिर गुमरगुंडा, करली महादेव मंदिर समलूर, कतियाररास स्थित भैरमबाबा मंदिर, दंतेवाड़ा स्थित मांई दंतेश्वरी मंदिर व विभिन्न शिवालयों तक पहुंचने की सुविधा मिल सकेगी। इस मिनी टूरिस्ट सर्किट की परिकल्पना करीब दशक भर पहले समलूर, सियानार व आस-पास के स्थानीय ग्रामीणों की दर्शनार्थी सेवा समिति ने की थी। इसके लिए बकायदा रूट चार्ट और नक्शा भी बनवा लिया था। इसके फ्लैक्स भी वर्ष 2015 में लगवाए गए थे। लेकिन फरसपाल-बिंजाम के बीच पड़ने वाली नदी पर पुल के अभाव में इस सर्किट की परिकल्पना साकार नहीं हो सकी है।

क्या है महादेव परिक्रमा पथ
दरअसल दंतेवाड़ा स्थित शिवालयों व गुमरगुंडा, समलूर व कतियाररास स्थित भैरमबाबा मंदिर को एक सर्किट में जोड़ने का प्रस्ताव स्वयं ग्रामीण युवकों ने तैयार किया था। इसे महादेव परिक्रमा पथ नाम दिया। लेकिन इस रास्ते में भोगाम-बिंजाम के बीच नदी आड़े आ गई। वर्ष 2012 में ग्रामीणों ने नदी में श्रमदान के जरिए वाहनों के लिए अस्थाई रास्ता भी तैयार किया था। प्रस्तावित रास्ते में दंतेवाड़ा में शक्तिपीठ व आस-पास के मंदिर से होकर बीजापुर रोड स्थित गुमरगुंडा का दिव्य जीवन संघ आश्रम व शिवालय में दर्शन के बाद समलूर स्थित प्राचीन करली महादेव मंदिर पड़ता है। इसके बाद श्रद्धालु समलूर से बिंजाम-भोगाम होते हुए कतियाररास में भैरमबाबा के दर्शन एक ही रूट पर कर सकते हैं।

यह होगा फायदा
महाशिवरात्रि पर हजारों की संख्या में भक्तजन सपरिवार विभिन्न शिवालयों में पहुंचकर दर्शन-पूजन करते हैं। महादेव परिक्रमा पथ पूरा हो जाने पर लोग एक साथ बारसूर से गुमरगुंडा व समलूर के शिवालयों के दर्शन करने के बाद नदी पार कर भोगाम होते हुए कतियाररास स्थित भैरमबाबा मंदिर पहुंच सकेंगे। इसके बाद कतियाररास से दंतेवाड़ा होते हुए गीदम के रास्ते यह परिपथ पूरा हो जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को धार्मिक पर्यटन से रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
बहुप्रतीक्षित पुल का इंतजार
फरसपाल-बिंजाम के बीच दंतेवाड़ा नदी पर बनने वाला पुल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा के 3 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। इस इलाके के ग्रामीण इस पुल के बनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस पुल के बन जाने से बिंजाम, समलूर, सियानार, कटुलनार, झोड़िया-बाड़म, सुरोखी समेत अन्य गांव फरसपाल से सीधे जुड़ सकेंगे। साथ ही रेल यात्रा की सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए कमालूर रेल्वे स्टेशन जा सकेंगे।
अब तक एप्रूवल नहीं मिला
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद दंतेवाड़ा प्रवास पर पहुंचकर इस पुल के निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन सरकार गठन के तीन साल पूरे होने के बावजूद इस पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस पुल को आरआरपी-2 में लिया गया है, जिसका टीएस हो चुका है, लेकिन अभी एएस मिलना बाकी है।