
CG Election 2025: नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर के दुर्गम इलाकों में आज ग्राम पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में लोकतंत्र की जीत का नज़ारा देखने को मिला। एलंगनार और झीरम जैसे गांवों के लोगों ने पहाडिय़ां चढक़र, 6-7 किलोमीटर का पैदल सफर तय करके मतदान केंद्रों तक पहुंचकर बैलेट की ताकत को बुलेट पर भारी साबित किया। यह इलाका वर्ष 2013 में हुए भीषण नक्सल हमले की वजह से चर्चा में रहा था, जब झीरम घाटी में कांग्रेस के तत्कालीन नेताओं की हत्या कर दी गई थी।
आज, उसी झीरम में सुरक्षा बलों के साए में हुए मतदान को लोकतंत्र के प्रति ग्रामीणों की आस्था का प्रतीक माना जा रहा है। बस्तर के इस नक्सल प्रभावित इलाके में मतदान की ऐतिहासिक तस्वीर साबित करती है कि लोकतंत्र के प्रति आमजन का विश्वास बढ़ रहा है। यह चुनाव न केवल ग्राम पंचायतों के लिए, बल्कि छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
झीरम का नाम 25 मई 2013 के सामूहिक नरसंहार से जुड़ा है, जब नक्सलियों ने कांग्रेस के राज्य नेतृत्व वाली एक कार्ययात्रा पर हमला कर 27 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें पूर्व मंत्री महेन्द्र कर्मा समेत अन्य लोग शामिल थे। इस घटना के बाद यह क्षेत्र काफी समय तक भय के साये में रहा, लेकिन उसके बाद इलाके में जमकर ऑपरेशन हुए और विकास भी हुआ। आज का मतदान यहां के लोगों के डर पर जीत को दर्शाता है। एक स्थानीय युवा लालि ने कहा कि 2013 में हमने खून देखा, आज हम बदलाव चाहते हैं।
हालांकि, मतदान के उत्साह के बीच बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। एलंगनार को झीरम से जोडऩे वाली सडक़ का निर्माण वर्षों से अधूरा है, जिसकी वजह से ग्रामीणों को हर बार पैदल चलकर आना पड़ता है। प्रशासन का दावा है कि सडक़ निर्माण पर काम चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह देरी उनके विकास को रोक रही है।
चूंकि यह इलाका नक्सल प्रभावित है, इसलिए मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सीआरपीएफ और पुलिस बलों की मौजूदगी में मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। सुरक्षाबलों ने मतदान केंद्रों के साथ-साथ मतदान के लिए आने-जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी बनाए रखी थी।
CG Election 2025: संवेदनशील झीरम क्षेत्र में निर्वाचन आयोग ने केंद्र संख्या 132 और 133 में दो पोलिंग बूथ स्थापित किए थे, जहां कुल 703 पंजीकृत मतदाता थे इसमें से करीब 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने वोट डाले। एलंगनार के ग्रामीणों को मतदान के लिए खड़ी पहाडिय़ों से उतरकर झीरम तक पहुंचना पड़ा। सुबह से ही मतदाताओं की कतारें देखी गईं, जबकि सुरक्षा के लिए सीाअरपीएफ और जिला पुलिस की टुकडय़िां तैनात थीं। एक अधिकारी ने बताया कि यहां के लोगों का जज्बा सराहनीय है। वे सुरक्षा अपने बेहतर भविष्य के लिए वोटिंग के लिए आए।
Updated on:
21 Feb 2025 12:52 pm
Published on:
21 Feb 2025 12:51 pm
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