गोगानवमी के विषय में एक कथा प्रचलित है, जिसके अनुसार गोगा मारू देश के राजा थे। उनकी मां बाछला, गुरु गोरखनाथजी की परम भक्त थी। एक दिन बाबा गोरखनाथ अपने शिष्यों समेत बछाला के राज्य में आते हैं। रानी को जब इस बात का पता चलता है तो वह बहुत प्रसन्न होती हैं। इधर, बाबा गोरखनाथ अपने शिष्य सिद्ध धनेरिया को नगर में जाकर फेरी लगाने का आदेश देते हैं। गुरु का आदेश पाकर शिष्य नगर में भिक्षाटन करने के लिए निकल पड़ता है।