
shani dev ko prasan karne ke liye kya kare
जबलपुर. बैसाख शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 11 मई को गंगा सप्तमी पर पुण्य के कई विशेष संयोग बन रहे हैं। ज्योतिर्विदों के अनुसार गंगा सप्तमी के दिन नर्मदा तीर्थ में स्नान-दान व पुण्य करने से शनि ग्रह की बाधा भी दूर होगी। गंगा सप्तमी के दिन मित्र योग बन रहा है। वहीं शनिवार के दिन पुष्य नक्षय होने के कारण शनि पुष्य योग बन रहा है।
ज्योतिर्विद जनार्दन शुक्ला ने बताया, बैसाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से धरती पर प्रकट हुई थी। इस दिन गंगा तीर्थ में स्नान-दान व पुण्य कार्य से पाप मिट जाते हैं। स्कंद पुराण एवं बाल्मिकी रामायण में गंगा सप्तमी का वर्णन मिलता है। विशेष बात है कि इस दिन मां नर्मदा में स्नान करने से भी गंगा तीर्थ में स्नान का पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष में एक दिन गंगा सप्तमी को मां गंगा नर्मदा तीर्थ में स्वयं आती हैं। वैसे तो नर्मदा के दर्शन मात्र से पाप मिट जाते हैं जबकि, इस दिन स्नान-दर्शन का ज्यादा महत्व होगा।
आचार्य डॉ. सत्येंन्द्र स्वरूप शास्त्री ने बताया, गंगा सप्तमी के दिन शनिवार और पुष्य नक्षत्र है, इस कारण इस दिन स्नान, दान व जीव हितकारी कार्यों से शनि ग्रह भी प्रसन्न होंगे। वर्तमान संवत्सर में शनि ग्रहों के राजा हैं। शनिवार को पडऩे वाली गंगा सप्तमी के दिन दान-पुण्य कई गुना फलदायी होगा। गंगा सप्तमी के दिन नर्मदा तटों पर स्थानीय एवं दूर दराज के श्रद्धालु स्नान-दान करने आएंगे। सुबह से शाम नर्मदा तीर्थ में दीपदान, महाआरती व भजन कीर्तन कर भक्ति की जाएगी। गंगा सप्तमी के विशेष पुण्य के लिए उमाघाट एवं तिलवाराघाट के सरस्वती घाट में आयोजित होने वाली महाआरती में काफी संख्या में लोग शामिल होंगे।
नर्मदा महाआरती समिति के संयोजक ओंकार दुबे ने बताया, गंगा सप्तमी की महाआरती में नर्मदा तट पर देर रात तक भक्तों पर का तांता लगा रहता है। इस बार शनि पुष्य योग के कारण भंडारे का प्रसाद वितरण करने वाले लोग भी ज्यादा रहेंगे।
Published on:
28 Apr 2019 09:15 am
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