मंदिर में सरस्वती, विष्णु, अग्नि, कंकाली देवी, उमा-महेश्वर, शिव-पार्वती, लक्ष्मी नारायण के भी दर्शन होते हैं । पशु पक्षियों को उनके ब्याल के रूप में उत्कीर्ण किया गया है। यह कल्चुरि काल की स्थापत्य कला के सर्वश्रेष्ठ मंदिरों में से एक है जिसे मध्यप्रदेश राज्य द्वारा संरक्षित घोषित किया गया है ।