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गणेशोत्सव प्रकृति बचाने केवल यहां बनतें हैं हजारों “गोबर गणेश”

गणेश चतुर्थी से शुरू दस दिवसीय आयोजन, शहर में जगह-जगह बनेंगे गोबर गणेश, 15 सितम्बर को निकलेगा गौर गणेश मुख्य चल समारोह, मंगलमूर्ति की दिव्य उपासना नर्मदा मैया की  महिमा के साथ नेत्रहीन कन्याएं देंगी शिवकन्या का संदेश

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Lali Kosta

Sep 07, 2016

gobar ganesh- only here formed are cow dung Ganesh

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जबलपुर। नर्मदा मिशन एवं अखिल भारतीय समर्थ सद्गुरु परिवार द्वारा पांच साल पहले शुरू की गई परंपरा अब संस्कारधानी जबलपुर की पहचान बन गई है। मां नर्मदा सहित जलाशयों को प्रदूषण से बचाने और उनके संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से समर्थ भैयाजी सरकार द्वारा गणेशोत्सव में पार्थिव गोबर गणेश बनाने की शुरुआत की गई थी। लोगों ने शुरू में इसका विरोध किया किंतु अब ये प्रकृति की सगुण उपासना और मंगलमूर्ति के प्रति आस्था प्रकट करने का सशक्त माध्यम बन गया है।

समर्थ भैयाजी सरकार ने बताया कि गौ माता के गौमय (गोबर) से गौर गणेश बनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है । कुछ दशकों पहले गणपति उपासना- उत्सव की परंपरा जो आज समूचे भारत वर्ष में है यह महाराष्ट्र से प्रारंभ हुई । ये परंपरा विशुद्ध मिट्टी एवं प्राकृतिक रंगों से निर्मित श्री गणेश की मूर्तियों को सार्वजनिक स्थलों एवं घर-घर में स्थापित कर गणपति उत्सव मनाने की है। इसका उद्देश्य समाज को संगठित कर एक मजबूत गणतंत्र की स्थापना था।

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ये फायदा है गोबर गणेश का
समर्थ भैयाजी सरकार बताया कि शास्त्रों के अनुसार गोबर में हमेशा लक्ष्मी का वास बताया गया है। इसमें रिद्धि-सिद्धि एवं तैतीस कोटि देवताओं का तेज समाया रहता है। जब हम अपने हांथो से गौर गणेश का निर्माण करते है, तब गौमय (गोबर) के रस में विद्यमान उर्जा हमारे शरीर में प्रवेश कर विभिन्न शारीरिक, मानसिक विकृतियों, रोगों को दूर करने में सहायक होती है। हमारे प्रतिरोधक एवं प्रतिरक्षात्मक तंत्र को गोबर की उर्जा सुद्रढ़ करती है।
यहां होंगे पार्थिव गोबर गणेश के निर्माण
संस्कारधानी के प्रमुख्य क्षेत्र - मदन महल , गढ़ा , रामपुर, तिलक भूमि की तलैया, श्रीनाथ की तलैया, अधारताल , दमोहनाका, विजय नगर, घमापुर ,कांचघर, लालमाटी, रांझी, धनवंतरी नगर।
ग्रामीण क्षेत्र - पनागर, गौर, बरेला, पाटन, कटंगी, मझौली, गंगई , बरगी में गोबर गणेश बनाए जाएंगे।
मध्य प्रदेश में - छिंदवाडा, होशंगावाद, नरसिंहपुर, सिवनी , लखनादौन , डिंडोरी, सागर, भोपाल , इंदौर , उज्जैन , भोपाल। उत्तर प्रदेश में - ललितपुर, राय बरेली , गोरखपुर। महाराष्ट्र में -मुंबई , पुणे, नागपुर, यवतमाल , अमरावती, वर्धा, चंद्रपुर। छतीसगढ़ में - रायपुर, बिलासपुर, धमतरी, दुर्ग, राजनाथ गांव। दिल्ली, झारखण्ड में - टाटा नगर , बैंगलुरु एवं भारत वर्ष के अन्य क्षेत्रों में गौमाता के गोबर से पार्थिव गौर गणेश का निर्माण होगा।

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