जबलपुर. गारमेंट और टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री के लिए जबलपुर निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। कई वर्षों से यहां गारमेंट इंडस्ट्री चल रही हैं। 600 छोटी-बड़ी इकाइयों में सलवार-सूट व अन्य वस्त्र तैयार होते हैं। इंदौर में हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में बडे़ निवेशकों को इस क्षेत्र में लाने के प्रयास होंगे। यहां तैयार होने वाले उत्पादों का निर्यात करने का प्रयास भी किया जाएगा।
रेडीमेड गारमेंट तैयार करने का शहर में अच्छा माहौल है। ज्यादातर घरों में इसका काम होता है। महिलाओं के अलावा बड़ी संख्या में पुरुष कारीगर भी गारमेंट तैयार करते हैं। निर्माताओं के पास आधुनिक मशीनें हैं। उन पर काम करने के लिए कुशल श्रमिक आसानी से मिल जाते हैं। इसलिए यदि कोई बड़ी गारमेंट निर्माता कंपनी यहां निवेश करती है तो उसके लिए कम से कम श्रमिकों की दिक्कत नहीं रहेगी।
पर्याप्त भूमि की उपलब्धता
पर्याप्त मात्रा में भूमि की उपलब्धता भी यहां की विशेषता है। कुछ समय पहले एक बड़ी वस्त्र निर्माता कंपनी ने यहां सर्वे कराया था। उसके यहां आने की सम्भावना बरकरार है। यह कम्पनी बल्क में वस्त्रों की सिलाई कराएगी। इसके लिए बड़ी इकाई की स्थापना प्रस्तावित है। शासन इस क्षेत्र में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए कई रियायतें दे रहा है। इसलिए यह क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
एक दर्जन राज्यों में सलवार-सूट सप्लाई
गौरतलब है कि शहर में रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर की स्थापना पहले ही हो चुकी है। यह क्लस्टर निवेशकों के लिए आदर्श बन सकता है। निर्यातकों को तलाशने की पहल शहर के गारमेंट निर्माता ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अपने उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं तलाशेंगे। अभी देश के एक दर्जन राज्यों में यहां बना सलवार-सूट सप्लाई होता है। अब वियतनाम, मलेशिया, दुबई और सिंगापुर जैसे देशों में इसे भेजने की तैयारी है। इस कारोबार से जुडे़ जानकारों का कहना है कि इन देशों में महिलाओं के बीच जिस प्रकार का फैशन प्रचलित है, वह यहां बनने वाले उत्पादों से मिलता-जुलता है। इसलिए इन देशों में सप्लाई की संभावनाएं हैं।

कारोबार को मिलेगी नई दिशा
जबलपुर गारमेंट एंड फैशन डिजाइन क्लस्टर एसोसिएशन के एमडी दीपक जैन ने बताया कि यदि यहां बने सलवार-सूट का निर्यात होता है तो कारोबार को नई दिशा मिलेगी। हमारे पास ऐसे कुशल कारीगर हैं कि वे नई डिजाइन और प्रचलित फैशल के अनुरूप वस्त्रों को आसानी से तैयार कर लेते हैं। इंदौर में हो रही समिट में शामिल होने के लिए वस्त्र निर्माताओं का एक दल जा रहा है। इसमें नए निवेशकों को जबलपुर लाने की दिशा में काम किया जाएगा।
15 एकड़ जमीन चिन्हित
जबलपुर में गारमेंट इकाइयों के लिए कुदवारी में गारमेंट क्लस्टर फेज-2 बन रहा है। इसके लिए 15 एकड़ जमीन चिन्हित की जा चुकी है। इसी से लगी बड़ी भूमि भी उपलब्ध है। ऐसे में इसका विस्तार भी हो सकता है। जिला प्रशासन ने इसका आवंटन उद्योग विभाग को कर दिया है। निजी क्षेत्र में भी जमीन उपलब्ध है। ज्ञात हो कि जबलपुर में पहले से इकाइयां चल रही हैं। इनका वार्षिक टर्नओवर 600 करोड़ रुपए है। इनमें 30 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।