जबलपुर. इलाज के लिए स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ पहुंची एक मादा हथिनी के इलाज के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। मादा हाथी के उपचार के लिए 20 लीटर ग्लूकोज इंजेक्शन के माध्यम से दिया गया तो वहीं 8 से 9 लीटर के लगभग दवा भी शरीर में भेजी गई। भारी भरकम हथिनी का न तो एक्सरे लिया जा सकता है न ही ऐसा कोई स्ट्रेचर था जिसपर उसे लिटाया जा सके। विदित हो कि छतरपुर से हथिनी को महावत गोविंद बाबा लेकर सोमवार को पहुंचे थे उसे यूरिन इंफेक्शन की शिकायत थी।
तीन महावतों ने किया कंट्रोल
करीब 3 हजार किलो वजनी हाथी के इलाज के लिए महावतों का भी सहयोग लेना पड़ा। इलाज के दौरान मादा हाथिनी बार-बार चिंघाड़ मारने चिकत्सक भी डरे थे। इसे देखते हुए एक महावत हाथी को लोहे के अंकुश से कंट्रोल करके खड़े रखा था तो दूसरे को हाथी की पीठ पर बैठाकर ग्लूकोज की बॉटल पकड़ाई गई थी जबकि तीसरा महावत हथिनी पर नजर रखे था। जबकि वाइल्ड लाइफ चिकित्सकों की टीम इलाज कर रही थी। क्योंकि थोड़ी सी भी गलती या चूक से हाथी के भड़कने का भी हमेशा डर बना हुआ था।
सीरिंज से भेजी गई मेडिसिन
बताया जाता है चंचल नामक इस मादा हाथी का वजन करीब 3 हजार किलो है। कुछ दिनों पूर्व इसका इलाज छतरपुर में किया गया लेकिन उसे आराम नहीं मिला। इसे देखते हुए महावत खुद ही लेकर वेटरनरी अस्पताल दोपहर लेकर पहुंच गए। हाथी के शरीर में 8 लीटर से अधिक इंट्रावीनुस मेडिसिन सीरिंज के माध्यम से भेजी गई। इसके साथ ही कई अन्य मेडिसिन भी वाईल्ड लाइफ एक्सपर्ट की निगरानी में दी गई। वीयू कुलपति डॉ.एसपी तिवारी ने भी चल रहे इलाज के बारे में चिकित्सकों से अपडेट ली। फिलहाल तीन से चार दिनों तक उपचार चलेगा इसके बाद उसमें हुए सुधार का पता चलेगा। तब तक मादा हाथी को निगरानी के साथ यहीं रखा जाएगा।