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नर्मदा किनारे प्यासे कंठ, कई क्षेत्रों में टैंकरों का ही सहारा

Drinking water crisis : गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर के कई इलाकों में ट्यूबवेल सूखने लगे हैं। ऐसे में टैंकरों की मांग बढ़ने लगी है।

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आधे राजय के लिए जल आपातकाल

आधे राजय के लिए जल आपातकाल

Drinking water crisis : गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर के कई इलाकों में ट्यूबवेल सूखने लगे हैं। ऐसे में टैंकरों की मांग बढ़ने लगी है। नगर में बड़ी आबादी अभी भी भूगर्भीय जल पर निर्भर है। ऐसे में ट्यूबवेल सूखने या हाईडेंट में खराबी आने पर समस्या बढ़ जा रही है। अधारताल से लगे ऊंचाई वाले इलाकों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। लगभग तीस हजार की आबादी वाले चार रिहायशी इलाकों में प्रतिदिन पैंतीस टैंकर से ज्यादा पानी लग रहा है। सामान्य दिनों में इन क्षेत्रों में लगभग पच्चीस टैंकर पानी प्रतिदिन लगता था। तीन ट्यूबवेल के सूखने से यहां पानी की मांग बढ़ गई है।

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Drinking water crisis : ट्यूबवेल और हाईडेंट सूखने या तकनीकी खराबी आने से बढ़ रही समस्या
गर्मी आते ही बढ़ने लगी है पानी की मांग

नगर के ऊंचाई वाले इलाकों संजय गांधी वार्ड के राजा बाबा कुटी, आजाद नगर, हुसैन नगर क्षेत्र में 250-300 फीट की गहराई पर भी नलकूप सूख रहे हैं। इस बार मार्च में ही ट्यूबवेल सूखने लगे हैं। अप्रेल में इन इलाकों के आधे से ज्यादा ट्यूबवेल सूख जाते हैं। ऐसे में प्रतिदिन क्षेत्र में 60-70 टैंकर तक पानी लग जाता है। गर्मी बढ़ने के साथ ही ऊंचाई वाले इलाकों में पानी के टैंकरों पर लोगों की निर्भरता बढ़ती जा रही है। गहरे नलकूप, हाईडेंट से टैंकरों को भरा जा रहा है।

Drinking water crisis : राजा बाबा कुटी, आजाद नगर, हुसैन नगर इलाकों में पानी के लिए टैंकर पर बड़ी निर्भरता है। क्षेत्र में ट्यूबेवल सूखने लगे हैं, ऐसे में टैंकर की मांग बढ़ गई है। अप्रेल से समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में क्षेत्र में सामान्य दिनों के मुकाबले दोगुने टैंकर लगते हैं।

  • कलीम खान, पार्षद संजय गांधी वार्ड