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आयुध निर्माणियों में हड़ताल से उत्पादन ठप

कर्मचारी संगठनों ने किया विरोध, लगातार चौथे दिन काम पर नहीं गए कर्मचारी  

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आयुध निर्माणियों के निगमीकरण की नीति के खिलाफ कर्मचारी हड़ताल पर रहे।

जबलपुर. आयुध निर्माणियों के निगमीकरण की नीति के खिलाफ कर्मचारी हड़ताल पर हैं। गुरुवार को शहर की चारों निर्माणियों में रोजाना की तरह सुबह हूटर बजा लेकिन कर्मचारी काम पर नहीं आए। जीआईएफ में अधिकारियों के प्रवेश का कर्मचारी नेताओं ने विरोध किया। वह जमीन पर लेट गए। कर्मचारी महासंघों के वरिष्ठ नेता भी निर्माणियों का दौरा कर कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की बात कही।

केन्द्र सरकार आयुध निर्माणियों का निगमीकरण करना चाहती है। इसका सभी कर्मचारी संगठन विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है निगम बनने से आयुध निर्माणियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा। कर्मचारी महासंघ एआईडीईएफ, बीपीएमएस और आइएनडीडब्ल्यूएफ के अलावा सिड्रा ने एक माह की हड़ताल का निर्णय लिया है। कर्मचारी महासंघों के नेता एसएन पाठक, अरुण दुबे और नरेन्द्र तिवारी ने चारों निर्माणियों में जाकर सभाएं लीं।

अस्पताल कर्मचारी शामिल
ओएफके में गुरुवार को अस्पताल के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए। जूनियर वक्र्स मैनेजर जरुर हड़ताल तोडऩा चाहते थे लेकिन कर्मचारी संगठनों की समझाइश के बाद वह भी फैक्ट्री नहीं गए। इस बीच एसक्यूएई के कई अधिकारी एवं कर्मचारी हड़ताल से इतर फैक्ट्री गए। इसका कर्मचारी संगठन लेबर यूनियन, कामगार यूनियन, सुरक्षा कर्मचारी यूनियन इंटक ने जमकर विरोध किया। हड़ताल के कारण बमों का उत्पादन ठप रहा। किसी सेक्शन का ताला तक नहीं खुला।

दो गेट बने कंट्रोल रूम
वीकल फैक्ट्री में हड़ताल को लेकर सुबह से लेकर रात तक गेट नम्बर एक और छह में सैकड़ों की तादाद में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तैनात रहे। हालांकि कर्मचारी हड़ताल के समर्थन में काम पर नहीं आए। इसबीच एक और छह के अलावा गेट नम्बर 3 एवं 4 में राष्ट्रीय कामगार यूनियन, प्रतिरक्षा मजदूर संघ, मजदूर यूनियन के पदाधिकारी ने सरकार की नीति के विरोध में सभाएं की। उन्होंने कर्मचारियों को निगमी करण के नुकसान से अवगत कराया।

बाहर निकले तो नारेबाजी
जीसीएफ में ग्रुप ए के अधिकारियों को कर्मचारी संगठनों के तंज का सामना करना पड़ा। वह सुबह फैक्ट्री गए। जब शाम को बस में बैठक गेट नम्बर एक से निकल रहे थे तभी श्रमिक संघ, मजदूर संघ और इंटक यूनियन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने उन पर तंज कसा। कर्मचारी नेताओं ने सरकार की नीति के विरोध में नारेबाजी की। इस बीच सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी भी मौके परमौजूद रहे।

विनती नहीं मानी तो सडक़ पर
जीआईएफ में भी जनता यूनियन, मजदूर यूनियन और इंटक से जुड़े संगठन के कर्मचारी नेताओं ने निगमीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया। कोई भी औद्योगिक कर्मचारी फाउंड्री में नहीं गया। इस कारण हैंड ग्रेनेड से लेकर एरियल बम की बॉडी की ढलाई का काम तीसरे दिन भी ठप रहा। इस बीच फाउंड्री के अधिकारी गुणवत्ता विभाग से जुड़े अधिकारी को अंदर कर रहे थे। इसका भारी विरोध हुआ। कर्मचारी जमीन पर लेट गए।