ऐसे कर दी गई फायरिंग
एलपीआर में आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) और गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) सहित दूसरी निर्माणियों के उत्पादों की टेस्टिंग की जाती है। बताया गया, एल-70 एंटी एयरक्रॉफ्ट गन से फ्यूज एफबी-40 की फायरिंग की जा रही थी। बम सही निशाने पर लगे इसके लिए बैरल के मजल पर एक साइट लगाया जाता है, जिसमें दूरबीन और दूसरे अन्य कीमती उपकरण लगे होते हैं। इसके बाद निशाना साधकर फायरिंग की जाती है, लेकिन इससे पहले सारे उपकरणों को मजल से हटाना पड़ता है। यहां पर इनको हटाए बगैर ही फायरमैन ने फायरिंग कर दी। इससे बैरल पर लगे मजल साइट में बम फंस गया और प्रेशर से मजल तेज आवाज के साथ फटकर टुकड़ों में बंट गया। पूरे मामले को देखकर वहां लगे कर्मचारी सकते में आ गए। अच्छी बात यह रही कि करीब एक फीट लंबे मजल के टुकड़े किसी को लगे नहीं।्र
एलपीआर प्रशासन पर आरोप
घटना के लिए एसक्यूएई (ए) आईएफए वर्कर्स यूनियन ने एलपीआर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। यूनियन के अध्यक्ष डीके मांझी, वक्र्स कमेटी और जेसीएम सदस्य जितेन्द्र सिंह यादव, संजीव दूसिया, जगनलाल का कहना है, फायरिंग में लापरवाही बरती गई और इसकी जांच भी नहीं कराई जा रही है।
बैरल में फटता तो होता बड़ा नुकसान
जानकारों का कहना है, यदि बम प्रेशर के साथ बाहर नहीं निकलकर बैरल में ही रह जाता तो बहुत बड़ा हादसा भी हो सकता था। बम अपनी गति के साथ साइट के अवरोध के बाद भी बाहर जाकर 250 फीट दूर लगे पिट पर लगा। इस घटना में दूरबीन और अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए।
कॉल को नहीं किया रिसीव
घटना के संबंध में जानकारी के लिए एसक्यूएई (ए) और एलपीआर के कमांडेंट ब्रिगेडियर बीके सिंह और प्रशासनिक अधिकारी पॉल पी जार्ज से फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन किसी भी कॉल को रिसीव नहीं किया गया।