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सरहद पर जाने से पहले युद्ध कौशल सीख रहे अ​ग्निवीर

जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में शुरू हुआ प्रशिक्षण

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जबलपुर . देश की सरहदों की सुरक्षा के लिए अग्निवीर युद्धकला में पारंगत हो रहे हैं। उन्हें हर परिस्थिति में खुद को मजबूत रखने की तकनीक बताई जा रही है। दुश्मन को मात देना हो या किसी आपदा में फंसे लोगों को बाहर निकालना, यह सभी चीजें उनके प्रशिक्षण का हिस्सा हैं। महज दस दिनों के प्रशिक्षण में कई बुनियादी चीजों को उन्होंने आत्मसात कर लिया है।

अग्निपथ योजना से थलसेना के लिए चयनित हुए युवा अग्निवीरों को जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले बैच में शामिल यह प्रशिक्षणार्थी बेहद उत्साहित हैं। वे प्रत्येक विधा में भागीदारी कर रहे हैं। सेना के प्रशिक्षक उन्हें शारीरिक रूप से खुद को मजबूत रखने के साथ ही आधुनिक हथियार चलाने की कला में निपुण कर रहे हैं। सुबह और शाम को अलग-अलग प्रकार का प्रशिक्षण देकर उन्हें सक्षम बनाया जा रहा है।

सेना की तरफ से मंगलवार को पत्रकारों को प्रशिक्षण और अग्निवीरों के उत्साह से अवगत कराया गया। इसके लिए उन तमाम स्थानों की जानकारी दी गई, जहां यह सैनिक अलग-अलग प्रकार की युद्ध कला को सीखते हैं। सभी अग्निवीर अत्यधिक उत्साहित हैं। उन्होंने खुद को अच्छी तरह से सैनिक दिनचर्या में ढाल लिया है। ये सभी युवा विभिन्न राज्यों से अग्निवीर भर्ती रैली में पास होकर भारतीय थल सेना में सम्मिलित हुए हैं।

पसीना और खून की कीमत समझते हैं सैनिक

जम्मू और कश्मीर राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर के ट्रेनिंग बटालियन कमांडर कर्नल भानुप्रताप सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण टीम अग्निवीरों को शारीरिक और युद्ध कौशल का प्रशिक्षण दे रही है। सैनिक की जिंदगी में अनुशासन और प्रशिक्षण अहम भूमिका अदा करते हैं। विषम परिस्थितियों एवं चुनौतियों में भी डटे रहकर देश की रक्षा करने में मदद करते हैं। अग्निवीर इस बात से अवगत हैं कि ‘प्रशिक्षण में बहाया गया पसीना युद्ध के दौरान खून बचाने के काम आता है’ ।

सरहद पर जाने से पहले युद्ध कौशल सीख रहे अ​ग्निवीर

छह महीने का है प्रशिक्षण कार्यक्रम

अग्निवीर भर्ती योजना के तहत यह सभी अग्निवीर अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद देश के विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों में तैनात अलग-अलग यूनिटों में जाकर देश की रक्षा के लिए अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें निशानेबाजी, शारीरिक, खेल व दूसरी विधाओं में पारंगत किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं ने कहा कि वे सेना में शामिल होकर उत्साहित हैं। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के उपरांत देश की सीमाओं पर जाकर अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं।