15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हाथी पर बैठकर विधानसभा पहुंचने वाले सेठ को बेटियों ने दिया कंधा

जनहित के मुद्दों पर अपनी ही पार्टी का करते थे विरोध, दिग्गजों को हराया था चुनाव में

3 min read
Google source verification

इंदौर

image

Amit Mandloi

Feb 24, 2018

suresh seth indore

पंचतत्व में विलिन हुए इंदौर के शेर सुरेश सेठ

इंदौर. इंदौर के शेर कहे जाने वाले पूर्व मंत्री सुरेश सेठ शुक्रवार को पंचतत्वों में विलिन हो गए। तिलकनगर मुक्तीधाम पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पहले उनकी शवयात्रा में सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं और शहर के सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।

पूर्व मंत्री सुरेश सेठ की शवयात्रा शाम को उनके घर से निकली। उनकी अंतिम यात्रा के लिए एक खुले वाहन को विशेष रूप से तैयार किया गया था। पूरे जीवनकाल में समय के पाबंद रहे सेठ की अंतिम यात्रा भी समय पर ही शुरू हुई। ठीक शाम 4 बजे उनके श्रीनगर निवास स्थान से उनकी पार्थिव देह को कांग्रेस के ध्वज (चरखे के तिरंगे) में रखकर लाया गया। विशेष रूप से तैयार किए गए वाहन पर रखकर उनकी अंतिम यात्रा शुरू की गई। उनकी शवयात्रा के दौरान उनके परिजनों सहित कांग्रेस के नेता ओर अन्य लोग भी साथ चल रहे थे। वहीं सेठ को अंतिम विदाई देने के लिए श्मशानघाट पर भी बड़ी संख्या में शहरवासी इकट्ठा हुए थे। वहीं श्मशान घाट के आगे ही वाहन से उनके शव को उतारकर पैदल ही उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। वहीं तिलकनगर मुक्तीधाम पर भी उनके अंतिम संस्कार के लिए विशेष तैयारी की गई थी। श्मशान में उनके शरीर को चिता पर रखने के बाद उनके परिजनों ने उनके अंतिम दर्शन किए, जिसके बाद उनके पुत्र विवेक सेठ ने उन्हें मुखाग्नि दी।
अंतिम यात्रा में भी बालिकाएं रहीं आगे

जीवनभर सुरेश सेठ बालिकाओं की शिक्षा और उनकी उन्नती के लिए प्रयास करते रहे। बालिकाओं के स्कूल-कॉलेज बनाने के साथ ही लड़कियों को सबल करने के प्रयास करने वाले सुरेश सेठ की अंतिम यात्रा में उनके परिवार की बेटियां भी शामिल हुई। यही नहीं बेटियों ने सेठ साहब की अंतिम यात्रा के दौरान उन्हें कंधा भी दिया।
जिन्होने हराया था वो भी थे गमगीन

सुरेश सेठ अपने जीवन का पहला विधानसभा चुनाव कल्याण जैन से १९६७ में हारे थे। जैन भी शुक्रवार को उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होने सेठ की अंतिम यात्रा में उन्हें कंधा भी दिया।
लगते रहे सेठ साहब अमर रहे के नारे

सुरेश सेठ की अंतिम यात्रा के दौरान सुरेश सेठ अमर रहे, इंदौर के शेर अमर रहे के नारे पूरे समय लगते रहे।
बड़े छोटे सभी थे मौजूद

सुरेश सेठ को अंतिम विदाई देने के लिए विधायक महेंद्र हार्डिया, जीतू पटवारी, पूर्व सांसद सज्जनसिंह वर्मा, हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष कृष्णमुरारी मोघे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता पं. कृपाशंकर शुक्ला, भाजपा नगराध्यक्ष कैलाश शर्मा, कांग्रेस शहर अध्यक्ष प्रमोद टंडन, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता उमेश शर्मा, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा, प्रदेश कांग्रेस महासचिव अश्विन जोशी, प्रदेश कांग्रेस सचिव राजेश चौकसे, नगर निगम सभापति अजयसिंह नरूका, एमआईसी सदस्य चंदू शिंदे, दिलीप शर्मा, पार्षद छोटे यादव, गुजराती समाज महामंत्री पंकज संघवी, युवक कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष अमन बजाज, युवक कांग्रेस विधानसभा-5 अध्यक्ष संतोष यादव समाजसेवी किशोर कोडवानी, बाबूभाई महिदपुरवाला, इंटक मंत्री कैलाश कुशवाह सहित शहर के अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
सभी ने दी मौन श्रद्धाजंली

श्मशान में शहर के समस्त लोगों ने इस दौरान सेठ को मौन श्रद्धांजली अर्पित की। इस दौरान किसी तरह की भाषणबाजी नहीं हुई।


सुबह से ही पहुंचने लगे थे नेता

सेठ साहब के अंतिम दर्शन करने के लिए सुबह से ही नेता उनके घर पहुंचने लगे थे। सुबह महापौर मालिनी गौड़, उनके पार्थिव देह के दर्शन करने पहुंची। वहीं दोपहर में भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सेठ को श्रद्धांजली अर्पित करने पहुंचे। वहीं विधायक उषा ठाकुर भी दोपहर में सेठ के घर पहुंची और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।


सुगनीदेवी कॉलेज की छात्राओं ने दी श्रद्धांजली

सेठ के निधन पर उन्हें सुगनीदेवी कॉलेज की छात्राओं और स्टॉफ ने भी श्रद्धांजली दी। कॉलेज में सुबह एक श्रद्धांजली सभा आयोजित की गई। जिसमें कॉलेज की समस्त छात्राएं शामिल हुईं। बच्चियों की पढ़ाई के लिए चिंतित रहने वाले सेठ ने मिल क्षेत्र में इस कॉलेज की स्थापना व्यक्तिगत प्रयासों से करवाई थी।
संगठनों ने भी दी श्रद्धांजली
सेठ को शहर के विभिन्न संगठनों ने श्रद्धांजली दी। मध्यप्रदेश श्रमजीवी सफाई कर्मचारी संघ, इंदौर नगर पालिक निगम कर्मचारी सहकारी साख संस्था, मप्र ओबीसी मोर्चा, कांग्रेस पार्षद दल,, जिनमें आम आदमी पार्टी ने भी सेठ को श्रद्धांजली दी और शोक बैठक रखी।

खुशामद नहीं सीखी थी सेठ ने

वरिष्ठ अभिभाषक और कई मामलों में सेठ के कानूनी सलाहकार रहे आंनद मोहन माथुर ने सेठ को याद करते हुए बताया कि वे खुशामद नहीं करते थे। उसूलों के पक्के नेता थे। उनके जीवन में उन्होने जो ठान लिया तो वो करते ही थे। ऐसा नहीं की सुबह यहां तो शाम को वहां। न ही वो किसी से डरते थे।