
जीवन में छलनी बनकर नहीं, सुपड़ा बनकर रहें
- साईं ग्राम बना शिर्डी धाम, प्रदर्शनी में उमड़ रही भक्तों की भीड़
इंदौर। आज फोर और फाईव जी का जमाना है लेकिन रोटी के साथ घी का जो स्वाद आता है, वैसे ही माता-पिता के साथ जी लग जाता है तो जीवन धन्य हो जाता है। हम कथा श्रवण करने आते हैं लेकिन जब जाते हैं तो जो ले जाना चाहिए वो नहीं ले जाते। सुपड़े के माफि क हमें भी कथा से अच्छी चीज अपने पास रखना लेना चाहिए। हमें सुपड़े के समान बनना है छलनी के समान नहीं।
उक्त विचार सांई कथा वाचक शुभ्रम बहल ने एरोड्रम रोड स्थित दलालबाग में आयोजित सात दिनी साईं भागवत कथा में रविवार को व्यक्त किए। उन्होंने कहा अपने घर मे प्रेम का वातावरण बनाएं। प्रेम में धर्म का निवास होता। धर्म के कारण ही धैर्य बना रहता है। क्रोध जागता है तो चैतन्य कम हो जाता है। अगर मन मे सत्संग का भाव आया है तो उसे तुरंत कर देना चाहिए। सत्संग के जीवन मे शांति के प्रादुर्भाव होता है, कटुता का नाश होता है। जिन लोगों को अच्छाई में भी बुराई ढूंढने की आदत होती है उनके जीवन में कभी शांति नहीं रह सकती।
लिम्बोदी में निकली 1100 फीट लंबी चुनरी यात्रा
इंदौर। लिंबोदी चुनरी यात्रा समिति द्वारा रविवार को लिम्बोदी स्थित शीतला माता मंदिर से भव्य चुनरी यात्रा निकाली गई। दोपहर 3 बजे समिति और मां दुर्गा ग्रुप द्वारा यात्रा शुरू की गई। इस यात्रा में झांकियां, बैंड बाजे, डीजे और घोड़े बघिया शामिल थे। विशेष रूप से नासिक से ढोल-ताशे का ग्रुप शामिल था। लिंबोदी चुनरी यात्रा समिति के संरक्षक कमल नागर ने बताया यह चुनरी यात्रा 1100 फीट लंबी थी। यात्रा में सैकड़ों मातृशक्तियां हाथों में चुनरी थामे चल रही थी। बालिकाएं और महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थी। यात्रा से पहले सभी ने महिलाओं और बेटियों पर हो रहे अत्याचार को रोकने का संकल्प लिया। आयोजक जयदीप नागर ने बताया यात्रा सीतलामाता मंदिर से शुरू होकर श्री कृष्ण एवेन्यू, लिंबोदी गांव, ब्रिजनैनी, गंगा विहार कॉलोनी, शिवधाम, पीस पॉइंट, श्री कृष्ण फेस टू होते हुए शीतला माता मंदिर पर आकर समाप्त हुई और महा प्रसादी का वितरण किया गया।
Published on:
14 Oct 2018 10:15 pm
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