
इंदौर. मप्र लोक सेवा आयोग (एमपी पीएससी) ने राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा का पेपर सैट करने वालों में से सात शिक्षाविदों को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। भविष्य में इन शिक्षाविदों को पीएससी की परीक्षा से संबंधित कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। पीएससी का दावा है कि इस तरह की कार्रवाई पिछली परीक्षाओं के बाद भी की गई है।
प्रारंभिक परीक्षा के पेपर के बाद मॉडल ऑन्सरशीट में पांच जवाब गलत होने और फिर फाइनल ऑन्सरशीट पर भी आपत्तियां मिलने से पीएससी विवादों में है। इंदौर सहित प्रदेश के कई शहरों में अभ्यर्थी आयोग पर लापरवाही और गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन रहे हैं। मालूम हो, फाइनल ऑन्सरशीट में दस सवालों के जवाब बदलना पड़े थे। साख पर उठ रहे सवालों के बाद शनिवार को पहली बार पीएससी के चेयरमैन भास्कर चौबे ने परीक्षा व परिणाम की प्रक्रिया सार्वजनिक की। उन्होंने बताया, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा के पेपर व ऑन्सरशीट में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि, आयोग ने गोपनीयता का हवाला देते हुए ब्लैकलिस्टेड हुए शिक्षाविदों के नाम बताने से इनकार किया है। ये जरूर बताया, सभी शिक्षाविद बाहरी राज्यों के है।
यूपीएससी से तुलना नहीं
ब्यौहार ने कहा, एमपी पीएससी देश का एकमात्र आयोग है, जो पूर्णत: पारदर्शी है। यही कारण है कि बाकी राज्यों के आयोग के सदस्य यहां व्यवस्था देखने आते है। यूपीएससी में पीएससी की तरह कभी गड़बड़ी का मामला नहीं आने पर उन्होंने कहा यूपीएससी से तुलना नहीं की जा सकती। क्योंकि न तो यूपीएससी कभी जवाब सार्वजनिक करता है और न ही आपत्तियां बुलाता है। हमारी प्रक्रिया पर सवाल न उठे इसलिए ही पहले मॉडल ऑन्सरशीट जारी की जाती है। चूंकि पूरी प्रक्रिया मैन्यूअल है, इसलिए गलती की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। गलती सामने आने पर हम सवाल ही डिलिट कर देते है। इससे मेरिट बिलकुल भी प्रभावित नहीं होती।
पद बढऩे से अभ्यर्थियों को ही फायदा
प्रारंभिक परीक्षा के बाद पद बढ़ाए जाने पर भी अभ्यर्थी लगातार आपत्ति दर्ज करवा रहे हैं। आयोग के परीक्षा नियंत्रक डॉ.दिनेश जैन ने बताया, विज्ञापन की शर्तों में ही पद बढऩे का उल्लेख रहता है। लगातार कई विभागों से नए पद जोड़े जाने की स्वीकृति मिलती है। हमारी कोशिश रहती है कि पहली परीक्षा में ही इसे शामिल कर लिया जाएं। रिजल्ट से पहले तक कितने भी नए पद जोड़े जा सकते हैं। पद बढऩे से अभ्यर्थियों को ही लाभ है, क्योंकि मुख्य परीक्षा में पद संख्या के १५ गुना अभ्यर्थी का चयन किया जाता है।
Published on:
01 Apr 2018 06:12 am
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