
इंदौर . प्यार शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता और न इसकी कोई परिभाषा होती है। इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। खूबसूरत अहसास दो लोगों को गहराई से आपस में जोड़ता है। प्यार नि:शब्द है, यह केवल दिल की ही आवाज सुन सकता है। ऐसी ही शब्दविहिन लव स्टोरी है मोनिका और ज्ञानेंद्र पुरोहित की।
मूक-बधिरों के लिए काम कर रहे हैं मोनिका-ज्ञानेंद्र पुरोहित की शादी को 17 साल हो चुके हैं। इस रिश्ते की शुरुआत अनोखे तरीके से हुई थी। वर्ष 1999-2000 में मोनिका और ज्ञानेंद्र इंदौर स्कूल ऑफ सोशल वर्क से समाजसेवा की पढ़ाई कर रहे थे। दोनों इस बात से अनजान थे कि वे कभी जीवनभर के बंधन में बंध जाएंगे। सीनियर-जूनियर की इस जोड़ी का मिलाप एक विज्ञापन से हुआ। ज्ञानेंद्र ने2001 में विज्ञापन देकर दिव्यांगों के लिए काम करने वाली समाजसेवी को संपर्क करने की इच्छा जताई। मोनिका हमेशा से ही समाजसेवा में आगे थी तो पिता ने ज्ञानेंद्र को ही मोनिका का जीवनसाथी चुनने का निर्णय लिया। जब ज्ञानेंद्र आए तो देखते ही दोनों ने शादी के लिए हां कह दी और 2001 में उनकी शादी भी हो गई।
साइन लैंग्वेज में प्रपोज
शादी की बात आगे बढऩे के दौरान ही ज्ञानेंद्र ने मोनिका को साइन लैंग्वेज में प्रपोज भी किया, लेकिन वह समझ नहीं पाई। उन्होंने मोनिका को साइन लैंग्वेज सिखाई। अब शादी के बाद भी वे अपनी कई सीक्रेट बातें भीड़ में भी आसानी से कर लेते हैं। अब दोनों मिलकर हजारों मूकबधिरों को न्याय दिला रहे हैं। साथ ही साइन लैंग्वेज में वे अब तक चार फिल्में भी डब कर चुके है। कई सामान्य बच्चों को भी साइन लैंग्वेज में राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत सिखा चुके हैं।
नि:स्वार्थ भाव रखना ही सच्चा प्रेम
बिना कुछ पाने की इच्छा रखते हुए नि:स्वार्थ भाव से देते रहना, यहां तक कि साथ होने की आकांक्षा भी नहीं रखना ही प्रेम है। हम सभी को चद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘उसने कहा था’ याद है। उसके नायक को तो पहली मुलाकात में ही मालूम है कि लडक़ी की सगाई हो चुकी है पर वह उसके लिए अपना जीवन कुर्बान कर देता है। प्रेम को न फूलों की जरूरत है और न उपहारों की।
- डॉ. पीएन मिश्रा, डायरेक्टर, स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स, डीएवीवी
प्रदर्शन, धोखा, लालच के लिए जगह नहीं
प्रेम की अनुभूति भावनाओं के साथ नैतिकता से भी जुड़ी है। इसमें प्रदर्शन, धोखा, लालच, अपेक्षा आदि के लिए कोई जगह नहीं होती। ये भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि केवल स्त्री-पुरुष का प्रेम ही प्रेम नहीं है। सृष्टि के हर जीव से प्रेम किया जा सकता है। मदर टेरेसा की तरह दीन-दुखियों से प्रेम करना ईश्वर से प्रेम करना है। प्रेम को केवल शारीरिकता के साथ जोडऩा गलत है।
- डॉ. राजेंद्र जैन, पूर्व विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र गुजराती कॉलेज
अनकंडिशनल एक्सपेक्टेंस
अनकंडिशनल एक्सपेक्टेंस से मेरा मतलब है बिना किसी शर्त के एक दूसरे को स्वीकार करना। एक्सपेक्टेशंस नहीं रहेगी तो जिंदगी स्मूथ चलेगी। जहां एक्सपेक्टेशन होती है वहां लड़ाई होती है। इसलिए साथी से केवल वो वादा करें जो पूरा हो सके। दूसरा मायना है, एक दूसरे को समझना और स्पेस देना। हर समय फीलिंग्स चेंज होती है औरप्यार धूमिल हो जाता है।
-माया बोहरा
Published on:
14 Feb 2018 05:58 pm
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