
इंदौर. मेरा बचपन से पेंङ्क्षटग में रुझान था। १२वीं तक स्कूल में पेंटिंग की। इसके बाद पेंटिंग के लिए पापा के विरुद्ध भी जाना पड़ा। उनका ख्वाब था कि मैं पुलिस में भर्ती हो जाऊं। उनके कई ख्वाब तोड़ता गया, कई बार डांट खाई, लेकिन झुका नहीं। अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए शिद्दत से जुटा रहा। मुझे एेसा कलाकार बनना था कि लोग मेरी पेङ्क्षटग्स को देखकर ही पहचान लें। मेरी ड्राइंग शीट देखकर पापा नाराज भी होते थे।
कुछ समय बाद पापा भी मेरे पैशन को समझ गए। इसके बाद मैंने दिल्ली के आर्ट कॉलेज में एडमिशन लिया, जिसमें गोल्ड मेडलिस्ट रहा। मेरा मानना है कि अपने ख्वाब को पूरा करने का जूनून होना चाहिए। यह कहना है फेमस चित्रकार विजेंद्र शर्मा का। वह शुक्रवार को इंदौर पहुंचे। विजेंद्र शनिवार को लॉ-मेगनोटो गैलेरी में आर्टिस्ट ममता अग्रवाल द्वारा लगाई जा रही पेटिंग एग्जीबिशन का उद्घाटन करेंगे। पत्रिका ने उनसे विशेष चर्चा की।
पारखी हो कलाकार की नजर
उन्होंने कहा कि कलाकार की नजरें पारखी होना चाहिए। उसे बाहरी सुंदरता की जगह अंदर की सुंदरता की पहचान रखना होगी। मैंने कृष्ण पर बहुत काम किया है। मैं उनके मनमोहक रूप और नटखटपन का मुरीद हूं। उन्हीं बातों को लोगों ने नेाटिस किया और मुझे रामायण, महाभारत, विक्रम बेताल और यश चोपड़ा की फिल्मों में अपनी कला को प्रदर्शित करने का मौका मिला। मेरी बनाई पेंटिंग्स फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन , मुकेश अंबानी , रत्न टाटा सहित मशहूर हस्तियों के घर में लगी है। राष्ट्रपति भवन में दो पेङ्क्षटग लगाई गई हैं।
आजादी के बाद बढ़ा रुझाान
उन्होंने कहा कि कला एक समुद्र है, जो इसमें आता है डूब जाता है। यह कला एक वक्त समाप्त होने लगी थी। मुगल दौर में कई बड़े कलाकार आए, लेकिन अग्रेंजो के शासन ने कलाकारों को समाप्त कर दिया। देश आजाद हुआ और फिर कला क्षेत्र में लोगों का रुझान बढऩे लगा। मेरे हुनर को देखते हुए एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि तुम्हारे हाथों में जादू है।
Published on:
21 Apr 2018 12:22 pm
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