
बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में भरमार संख्या में हुए निर्माण कार्य। ये सिर्फ अवैध नहीं हैं, बल्कि भोपाल के जीवन के लिए बहुत बड़ा संकट हैं।
प्रसंगवश.भोपाल. बड़ा तालाब राजधानी की लाइफलाइन है, लेकिन वर्तमान हालात ऐसे हैं कि ये खुद ही वेंटिलेटर पर है। लाइफलाइन को ही लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जरूरत है। इसलिए कि तालाब की सारी सीमाएं अतिक्रमण की चपेट में हैं। भू-माफियाओं और रसूखदारों ने इसके अंदर तक घुसकर इसकी छाती पर ही सीमेंट से बड़े-बड़े घाव कर दिए हैं। कैचमेंट क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों से तालाब का दायरा निरंतर सिकुड़ता जा रहा है। तालाब के जिस ओर निगाह जाती है, उसी तरफ मकान, मैरिज गार्डन, होटल, अस्पताल, फार्म हाउस नजर आते हैं। जिम्मेदार देखकर भी अनजान हैं और तालाब अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है।
प्रशासन और अफसर बार-बार सर्वे कर नक्शा बनाकर अवैध निर्माण चिह्नित करते हैं, लेकिन इन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं करते, बल्कि भू-माफियाओं द्वारा किए गए अवैध निर्माणों को बचाने के रास्ते तलाशते रहते हैं। 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने तालाब के अंदर बनाई गई रिटेनिंग वॉल को तोडऩे के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक उस पर कार्रवाई नहीं की गई।
खानूगांव, बैरागढ़ क्षेत्र, नीलबड़-रातीबड़ की ओर तालाब किनारे किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद रसूखदारों ने बड़े पैमाने पर भूखंड काट दिए हैं। तालाब के साथ हो रहे खिलवाड़ का असर इसकी जल संग्रहण क्षमता और जलीय जीवन पर हुआ है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश को भू-माफियाओं से मुक्त करने का सपना जनता को दिखाया है। उनके निर्देश पर इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में अफसरों ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। ऐसे में वेंटिलेटर पर पड़ी राजधानी की लाइफलाइन बड़ा तालाब उम्मीद भरी निगाहों से अफसरों की ओर देख रहा है। और जैसे कह रहा है-‘अभी नहीं तो कभी नहीं। यही मौका है, मेरी भी सुध लो। भू-माफियाओं की जो सूची बना रहे हो, उसमें सबसे ऊपर उन्हें रखो जिन्होंने मेरे सीने में घाव कर दिए हैं। लोहा गर्म है, हथौड़ा मार दो।
Published on:
16 Dec 2019 12:51 am
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