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माता-पिता को खोने के दर्द को बनाया ताकत, धापु कुमारी बनीं MBBS डॉक्टर

जीवन की सबसे बड़ी शक्ति माता-पिता का आशीर्वाद होता है, लेकिन जब वही साया बीच सफर में उठ जाए तो मंजिल तक पहुंचने का संघर्ष कई गुना बढ़ जाता है। राजस्थान के बालोतरा जिले की समदड़ी तहसील के बुरड़ गांव की बेटी एवं वर्तमान में कर्नाटक के होसपेट निवासी स्वर्गीय जोधाराम टोंटिया की सुपुत्री डॉ. धापु कुमारी ने ऐसे ही कठिन हालात में अपने साहस, धैर्य और अथक परिश्रम के बल पर एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर डॉक्टर बनने का गौरव प्राप्त किया है। धापु कुमारी ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत, लगन तथा दृढ़ संकल्प के बल पर एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त कर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त कर डॉक्टर बनीं डॉ. धापु कुमारी, जिसने विपरीत परिस्थितियों और माता-पिता को खोने के गहरे दुख के बावजूद अपने सपनों को साकार कर प्रेरणादायी मिसाल पेश की।

एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त कर डॉक्टर बनीं डॉ. धापु कुमारी, जिसने विपरीत परिस्थितियों और माता-पिता को खोने के गहरे दुख के बावजूद अपने सपनों को साकार कर प्रेरणादायी मिसाल पेश की।

डॉ. धापु कुमारी की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार की खुशी का अवसर नहीं, बल्कि पूरे आंजणा कलबी पटेल समाज और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि विपरीत परिस्थितियां यदि मनुष्य के इरादों को परखती हैं, तो दृढ़ संकल्प उन्हें सफलता की नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचा सकता है। उनकी सफलता के पीछे एक ऐसी मार्मिक कहानी है, जो हर किसी को भावुक कर देती है।

आंसुओं को हौसले में बदला
जिस बेटी को डॉक्टर के रूप में देखने का सपना उसके माता-पिता ने संजोया था, उसी सपने के साकार होने से पहले ही दोनों इस संसार को छोड़कर चले गए। जोधाराम टोंटिया और उनकी धर्मपत्नी अपनी लाडली को डॉक्टर की सफेद कोट में देखने की तमन्ना अपने दिल में लिए ही ईश्वर के चरणों में विलीन हो गए। माता-पिता के असामयिक निधन का गहरा आघात किसी भी संतान को तोड़ सकता है, लेकिन डॉ. धापु कुमारी ने इस दु:ख को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने आंसुओं को हौसले में बदलते हुए पढ़ाई जारी रखी और कठिन परिश्रम के दम पर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर अपने माता-पिता के सपनों को साकार कर दिखाया।

हौसले के आगे हार गई मुश्किलें
चौधरी आंजणा पटेल समाज हुब्बल्ली-धारवाड़ के पूर्व सचिव किशोर पटेल गोलिया चौधरियान ने कहा कि उनकी यह सफलता इस बात का संदेश देती है कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत सच्ची हो, तो जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। डॉ. धापु कुमारी की इस प्रेरणादायी उपलब्धि पर प्रवासी समाज एवं पटेल समाज के लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।डॉक्टर बनने के बाद अब धापु कुमारी समाज सेवा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर योगदान देने का लक्ष्य रखती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे पाने का संकल्प मजबूत हो तो सफलता अवश्य मिलती है। उनकी यह उपलब्धि संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की प्रेरक मिसाल बन गई है।