Read this also: आप सुरक्षित रहें इसलिए यह मां बच्चों को गांव छोड़ दिन रात लड़ रही कोरोना से जंग दरअसल, पिपरिया तहसील के पाली गांव में एक किसान अपनी खेतों की फसल काटकर प्रतिबंध के बावजूद नरवाई में आग लगा दी। आग की लपटों को हवा का सहारा मिला और वह बेकाबू हो गईं। आसपास के खेतवाले अभी कुछ सोचते इसके पहले खेतों को आग अपने आगोश में लेना शुरू कर दी। देखते ही देखते यह दावानल आसपास के गांवों तक पहुंचने लगा।
आग की लपटें अपना दायरा बढ़ाती जा रही थीं, इधर किसानों का दिल बैठा जा रहा था। किसान अपने संसाधनों से आग पर काबू करने लगे साथ ही फायर स्टेशन में भी फोन कर मदद मांगी। इसके बाद दो दमकल गाड़ियों के अलावा ग्राम पंचायतों के टैंकर्स को भी आग को बुझाने के लिए लगाया गया। शाम तक अधिकतर आग बुझा ली गई लेकिन देर रात तक पूर्ण रूप से इस पर काबू पाया जा सका।
Read this also: इनसे मारपीट नहीं बल्कि सलाम कीजिए, कर्इ बड़े शहरों को आइना दिखा रहा एमपी का पिपरिया तहसीलदार राजेश बोरासी ने बताया कि आगलगी की शुरूआत पाली गांव से हुई। इसके बाद यह सर्रा, लाझी, बूचाल, नंदबाड़ा, टड़ा, बकाज गांव तक अपना तांडव मचाया। उन्होंने बताया कि दो हजार एकड़ से अधिक रकबा में आग फैल गई। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है। तहसीलदार ने बताया कि कहीं फसल को नुकसान तो नहीं हुआ इसका आंकलन कराया जाएगा।
आगलगी की शिकायत पर गांववालों की मदद को पहुंचने वालों में एसडीओपी शिवेंदू जोशी, तहसीलदार राजेश बोरासी के अलावा राजस्व, नगर पालिका व जनपद पंचाय के कर्मचारी व जिम्मेदार संबंधित गांवों में पहुंचने वालों में शामिल रहे।
Read this also: मध्यप्रदेश के इन अस्पतालों में वेंटिलेटर नहीं, दो डॉक्टरों के भरोसे अस्पताल इन लोगों पर होगा केस कार्यपालक मजिस्ट्रेट/तहसीलदार राजेश बोरासी ने बताया कि नरवाई जलाने वाले किसानों के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। इसके लिए जिला कलक्टर को रिपोर्ट भेजने के साथ थाने में भी रिपोर्ट भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि पाली के रामकृष्ण, मुहारीकला के मलखान, मनोहर, राजाभैया के खिलाफ धारा 188 व आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 के तहत केस दर्ज कराया जाएगा।