
अल्जाइमर रोग के इलाज के लिए नई उम्मीद! न्यूयॉर्क: वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर रोग के इलाज में मददगार एक नए क्लू की खोज की है. इस खोज के मुताबिक, बुढ़ापे में दिमाग में जमा होने वाले एमाइलॉइड नामक पदार्थ की मात्रा ही तय करेगी कि किस मरीज को नए एंटी-एमाइलॉइड इलाज से फायदा होगा.
अमेरिका के पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बताया कि एमाइलॉइड दिमाग में जमा होने वाले गंदे पदार्थ के गुच्छे हैं, जो अल्जाइमर रोग का कारण बनते हैं. इन गुच्छों की मात्रा बढ़ने से अल्जाइमर का खतरा बढ़ता है.
उन्होंने बताया कि 80 साल से ऊपर के लोगों में अल्जाइमर का खतरा सबसे ज्यादा होता है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि इस उम्र के लोगों में एमाइलॉइड की मात्रा किस तरह बढ़ती है और इसका अल्जाइमर से क्या संबंध है.
इस नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 94 बुजुर्ग लोगों पर शोध किया, जो शुरू में मानसिक रूप से स्वस्थ थे. उन्होंने इन लोगों के दिमाग में एमाइलॉइड की मात्रा को मापा और पाया कि बुढ़ापे में यह मात्रा तेजी से बढ़ती है, जबकि कम उम्र के लोगों में यह धीरे-धीरे बढ़ती है.
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो लोग शुरू में ही एमाइलॉइड पॉजिटिव थे, उनमें अल्जाइमर रोग का खतरा उन लोगों से दोगुना था जो एमाइलॉइड नेगेटिव थे. हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि एमाइलॉइड की मात्रा ही सबकुछ नहीं है. दिमाग में होने वाले अन्य बदलावों का भी अल्जाइमर रोग पर असर पड़ता है.
इस खोज से अल्जाइमर रोग के इलाज के लिए नई उम्मीद जगी है. अब वैज्ञानिक ऐसे इलाज विकसित करने पर ध्यान दे सकते हैं जो न सिर्फ एमाइलॉइड की मात्रा कम करें, बल्कि दिमाग में होने वाले अन्य बदलावों को भी रोकें.
मुख्य बातें:
एमाइलॉइड की मात्रा अल्जाइमर रोग के खतरे को बढ़ाती है.
बुढ़ापे में एमाइलॉइड की मात्रा तेजी से बढ़ती है.
एमाइलॉइड पॉजिटिव लोगों में अल्जाइमर का खतरा ज्यादा होता है.
एमाइलॉइड की मात्रा कम करने के लिए नए इलाज की जरूरत है.
Updated on:
24 Dec 2023 03:36 pm
Published on:
24 Dec 2023 03:35 pm
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