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आंखों, नींद और स्वास्थ्य के लिए बुरी है ब्लू लाइट

ज्यादातर लोग हर दिन कई घंटों तक किसी न किसी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण देखते हैं। इसमें टीवी, स्मार्टफोन, टैबलेट और गेमिंग सिस्टम शामिल हैं। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। नीला प्रकाश दृश्यमान प्रकाश स्पेक्ट्रम का हिस्सा है। 380 से 500 नैनोमीटर रेंज के भीतर इसमें सबसे कम तरंग दैर्ध्य और उच्चतम ऊर्जा होती है।

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आंखों, नींद और स्वास्थ्य के लिए बुरी है ब्लू लाइट

आंखों, नींद और स्वास्थ्य के लिए बुरी है ब्लू लाइट

नीली रोशनी सतर्कता को बढ़ाती है, लेकिन इससे शरीर के प्राकृतिक जागने और सोने का चक्र (सर्केडियन रिदम) प्रभावित होता है। आंखें नीली रोशनी को रोकने के मामले में अच्छी नहीं होती। समय के साथ नीली रोशनी आंख के सामने (कॉर्निया और लेंस) से होकर गुजरती है और रेटिना तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकती है।

मददगार टिप्स

ब्लू-लाइट फिल्टर-
स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर स्क्रीन के लिए ब्लू-लाइट फिल्टर लगाएं। फिल्टर डिस्प्ले की दृश्यता को प्रभावित किए बिना नीली रोशनी को आपकी आंखों तक पहुंचने से रोकते हैं और इससे रेटिना को कम नुकसान पहुंचता है।

20-20-20 नियम का पालन -
डिजिटल आई स्ट्रेन को कम करने के लिए 20-20-20 नियम का पालन करें। हर 20 मिनट में 20 फीट की दूरी पर किसी भी वस्तु को देखने के लिए 20 सेकंड का ब्रेक लें। इस तरह एक घंटे में तीन बार यह प्रक्रिया दोहराएं।

ब्राइटनेस कंट्रोल-
डिवाइस स्क्रीन पर रोशनी और चकाचौंध को नियंत्रित करें। स्क्रीन पर देखने के लिए अच्छी दूरी और पॉश्चर निर्धारित करें। पुष्टि करें कि आंखों पर कोई दबाव न पड़े।

आंखों की जांच-
अपने नेत्र चिकित्सक से आंखों की जांच के दौरान नीले प्रकाश संरक्षण और डिजिटल उपकरण के इस्तेमाल के बारे में बात करें और जरूरी होने पर चश्मा लगाएं।