14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फेफड़ों में जान फूंक देगा, रोजाना 10 गुब्बारे फुलाना, रिसर्च में साबित

बैलून थेरेपी फेफड़ों और श्वसन पथ के रोगों में राहत देती है। डायाफ्राम और पसलियों को इंटरकोस्टल मांसपेशियो द्वारा मूवमेंट किया जाता है। जो गुब्बारे फुलाने के दौरान सक्रिय होते हैं। इससे फेफड़ों के लिए ऑक्सीजन लेना और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ना संभव हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक गुब्बारे फुलाने से फेफड़ों की सेहत सुधरती है। हालांकि बात का पूरा ध्यान रखें कि किसी मेडिकल कंडीशन में चिकित्सक से सलाह लिए बिना इसे शुरू न करें। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रतिदिन 10 से 15 गुब्बारों को फुलाने से फेफड़ों की क्षमता सुधरती है।

3 min read
Google source verification

जयपुर

image

Jaya Sharma

Jan 02, 2024

balloon_blowing_5.jpg

बैलून थेरेपी फेफड़ों और श्वसन पथ के रोगों में राहत देती है। डायाफ्राम और पसलियों को इंटरकोस्टल मांसपेशियो द्वारा मूवमेंट किया जाता है। जो गुब्बारे फुलाने के दौरान सक्रिय होते हैं। इससे फेफड़ों के लिए ऑक्सीजन लेना और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ना संभव हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक गुब्बारे फुलाने से फेफड़ों की सेहत सुधरती है। हालांकि बात का पूरा ध्यान रखें कि किसी मेडिकल कंडीशन में चिकित्सक से सलाह लिए बिना इसे शुरू न करें। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रतिदिन 10 से 15 गुब्बारों को फुलाने से फेफड़ों की क्षमता सुधरती है।

balloon_blowing_3.jpg

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि गुब्बारे फुलाने से हम जितनी अधिक आॅक्सीजन की आपूर्ति करते हैैं, उससे हम लम्बे समय तक बिना सांस फूले और ताजगी के साथ काम कर सकते हैं। गुब्बारा फुलाना फेफड़ों के लिए उपयोगी एक्सरसाइज है। इससे हमारे फेफड़ों को ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में लेने में मदद करती हैं। यहां ये ध्यान देने की बात है कि आपको इस एक्सरसाइज को धीरे—धीरे शुरू करना होगा। एकदम से बहुत ज्यादा गुब्बारे फुलाने से आप परेशानी में आ सकते हैं। पहले कुछ ही गुब्बारे फुलाएं और उसके बाद धीरे—धीरे इन गुब्बारों की संख्या बढ़ाए। यदि आप घुटनों पर बैठकर या एक्सराइज बॉल पर बैठकर गुब्बारे फुलाते हैं, तो इससे मिलता है ज्यादा फायदा।

balloon_blowing_workout.jpg

विशेषज्ञों के मुताबिक उम्र के बढ़ने के साथ ही फेफड़ों में फाइब्रोसिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज अस्थमा जैसी स्थितियां उत्पन्न होने की संभवनाएं रहती है। ऐसे में फेफड़ों को स्वस्थ रखना जरूरी है, एक्सरसाइज इसका एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है।