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हीट वेव से किन्नू बागों को खतरा, बचाव के बता रहे तरीके

हनुमानगढ़. हीट वेव से किन्नू बागों को पर खतरा मंडरा रहा है। बागों को लू, तापमान एवं फल झडऩे से बचाने के लिए उचित प्रबंधन आवश्यक है।

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हीट वेव से किन्नू बागों को खतरा, बचाव के बता रहे तरीके

हीट वेव से किन्नू बागों को खतरा, बचाव के बता रहे तरीके

-पौधों के चारों ओर धान की पराली एवं अन्य फसल अवशेष बिखेरकर मल्चिंग करने की सलाह
-नमी की कमी एवं अधिकता दोनो ही स्थिति में फल झडऩे की बढ़ती आंशका
हनुमानगढ़. हीट वेव से किन्नू बागों को पर खतरा मंडरा रहा है। बागों को लू, तापमान एवं फल झडऩे से बचाने के लिए उचित प्रबंधन आवश्यक है। वर्तमान में किन्नू, माल्टा, मौसमी, डेजी एवं नीम्बू इत्यादि बागों में फल विकसित अवस्था में है। अधिकतर बागों में फल, मटर के दाने अथवा इससे बड़ा आकार ले चुके हैं। बागों की यह अवस्था अत्यन्त महत्वपूर्ण अवस्था है। इस समय अचानक तापमान वृद्धि एवं नमी की न्यूनता के कारण फल झडऩे की समस्या देखी गई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान बढऩे एवं लू चलने की आशंका है। अधिक तापमान एवं लू के प्रभाव से फल झडऩे की समस्या से बचाव के लिए किसानों को उद्यान विभाग की ओर से कुछ सलाह दी गई है। उक्त सलाह को मानने पर बागों को सुरक्षित किया जा सकता है। जानकरी के अनुसार नमी की कमी एवं अधिकता दोनो ही स्थिति में फल झडऩे की आशंका बढ़ जाती है। अत: इस समय ड्रिप के माध्यम से बागों में मृदा संरचना एवं बाग की आयु के अनुसार नियमित अंतराल पर सिंचाई किया जाना आवश्यक है। पौधों के चारों ओर धान की पराली, सरसों की पंलू एवं अन्य फसल अवशेष बिखेरकर मल्चिंग किया जाना आवश्यक है। मल्चिंग के कारण लम्बे समय तक नमी का स्तर बना रहता है। इससे बार-बार सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही मल्चिंग के कारण भूमि का तापमान नियंत्रित रहता है। जिससे सूक्ष्म जीवों की क्रियाशीलता बनी रहती है। खरपतवार नियंत्रण में भी मल्चिंग आवश्यक है। हनुमानगढ़ जिले में किन्नू के बाग खूब लगे हैं। करीब 3260 हैक्टेयर में लगे बागों में फल निकल रहे हैं। यहां के फलों की मांग आसपास के प्रदेशों में भी रहती है।

सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिडक़ाव करें
अधिक तापमान एवं पर्याप्त मात्रा में नमी नहीं मिलने के कारण पौधों में स्ट्रेस उत्पन्न होता है। जिससे पौधों में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण फल झडऩा शुरू हो जाते हैं। फलों को झडऩे से रोकने एवं पौधों को स्ट्रेस से बचाव के लिए संतुलित मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिडक़ाव जरूरी है। बाग को लू से बचाने के लिए बाग की उतरी-पश्चिमी सीमा पर शीघ्र बढ़वार करने वाले पौधे यथा- आंवला, जामुन, बेलपत्र इत्यादि के पौधों की दो लाइन वायुरोधक वृक्षों के रूप में स्थापित करनी चाहिए। जिससे गर्म हवा एवं लू की वजह से बाग में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

ताकि बाग रहें सुरक्षित
विभाग स्तर पर किसानों को सलाह दी जाती है कि बागों को अधिक तापमान एवं लू से बचाने के लिए मल्चिंग करने के उपरांत सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों के माध्यम से नियमित अंतराल में सिंचाई करें। विभागीय सिफारिश के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिडक़ाव अवश्य रूप से करें। ताकि बाग गर्म मौसम में भी बाग सुरक्षित रह सकें।
-साहबराम गोदारा, सहायक निदेशक, उद्यान विभाग हनुमानगढ़