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हजारों किसानों की फसलें हुई खराब, अब मिले क्लेम तो दर्द पर लगे मरहम

हनुमानगढ़. आपदा यानी विपरीत मौसम होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की सोच के साथ पूरे देश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई थी।

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हजारों किसानों की फसलें हुई खराब, अब मिले क्लेम तो दर्द पर लगे मरहम

हजारों किसानों की फसलें हुई खराब, अब मिले क्लेम तो दर्द पर लगे मरहम

-दो से तीन फसलों का फसल बीमा क्लेम बकाया होने से किसानों में मायूसी
-गत खरीफ सीजन के क्लेम का सेटलमेंट भी अब तक नहीं होने से किसानों में बढ़ रहा रोष
हनुमानगढ़. आपदा यानी विपरीत मौसम होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की सोच के साथ पूरे देश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई थी। परंतु जमीनी हकीकत यह है कि इस योजना का त्वरित लाभ मिलना अब तक किसानों को नसीब नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि फसल खराबे के दर्द पर मरहम लगाने की आस में शुरू की गई उक्त योजना का समुचित लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। डिजिटल जमाने में सबकुछ फटाफट होने के बावजूद जिले के हजारों किसान ऐसे मिल जाएंगे जिनका दो से तीन फसलों का बीमा अब तक अटका हुआ है। ऐसे हजारों किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह योजना किसानों की मदद के लिहाज से काफी अच्छी है। परंतु देरी से क्लेम मिलने की वजह से किसानों को काफी दिक्कतें आ रही है। गत खरीफ का पूरा क्लेम अटका हुआ है। गत रबी सीजन का भी बहुत से किसानों का क्लेम बकाया होने से वह अब आंदोलन की राह पर चलने को मजबूर हो रहे हैं। नोहर, भादरा व पल्लू क्षेत्र के किसान कई बार इसे लेकर सरकार को चेता चुके हैं। परंतु सरकार स्तर पर अभी तक खरीफ सीजन के क्लेम का सेटलमेंट भी नहीं किया गया है। फिर क्लेम कब तक किसानों को जारी किया जाएगा, इस बारे में सटीक जवाब देने से सभी अधिकारी बच रहे हैं। परलीका के किसान संदीप कस्वां का कहना है कि वह सरसों, चना, गेहूं, ग्वार आदि फसलें उगाते हैं। मौसम खराब होने पर फसल का क्लेम मिले, इसके लिए हर वर्ष बीमा करवाते हैं। स्थिति यह है कि गत खरीफ सीजन 2024 का बीमा अब तक नहीं आया है। लास्ट बीमा 2022 का ही प्राप्त हुआ है। जो 34 रुपए ही आया था। जबकि फसल खराबे के लिहाज से लगभग 20 हजार आना चाहिए था। संदीप का कहना है कि जिनके जमीन कम, उनको फसल बीमा का फायदा कम ही मिलता है। वहीं जिनके जमीन ज्यादा है, उनको फसल बीमा का लाभ भी ज्यादा मिलता है। फसल बीमा की प्रक्रिया तो ठीक है। परंतु जिन किसानों के खेतों में खराबा होता है, उन्हें तत्काल क्लेम देने की व्यवस्था करनी चाहिए। सरकार किसानों को समय पर फसल बीमा देना शुरू कर दे। अन्यथा इसे बंद कर दे। सेटेलाइट से फसल बीमा प्रयोग नहीं कर इसे गिरदावरी आधारित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेटेलाइट में अनेक बार सही लहराती फसलों के बीच में नुकसान हुए खेत का पता नहीं चल पाता है।

एक लाख 43 हजार किसानों के हाथ खाली
हनुमानगढ़ जिले में खरीफ 2024 में एक लाख 43 हजार किसानों ने अपनी फसलों का बीमा करवाया था। इसकी एवज में बड़ी राशि प्रीमियम पेटे उनके खातों से काटी गई थी। परंतु अब तक एक भी किसान को फसल बीमा का क्लेम नहीं मिला है। इसी तरह रबी 2023 में एक लाख 38 हजार किसानों ने बीमा करवाया था। इसमें खराबे के अनुपात में करीब 124 करोड़ का क्लेम सेटलमेंट किया गया। इसके तहत 122 करोड़ का क्लेम किसानों को वितरित किया गया है। करीब डेढ़ करोड़ की राशि पेडिंग है।

समय पर करवा रहे बीमा पर समय पर नहीं मिल रहा क्लेम
नोहर के रामगढ़ क्षेत्र के किसान पवन नैण का कहना है कि वह सरसों, चना, गेहूं आदि फसलें उगा रहे हैं। वह हर वर्ष मदद की आस में फसलों का बीमा भी करवा रहे हैं। गत खरीफ सीजन 2024 का बीमा अब तक नहीं आया है। 2024 ही नहीं पीछे का भी फसल बीमा बाकी पड़ा है। दो-तीन फसलों का बीमा अब तक बाकी है। हम तो समय पर बीमा करवाते हंै परंतु हमें समय पर बीमा नहीं मिलता है। सेटेलाइट की जगह किले वाइज गिरदावरी होनी चाहिए। पटवारी व ग्रामसेवक को भी समय-समय पर किसानों के खेतों का निरीक्षण करना चाहिए। जिससे कि फसल बीमा का सही आंकलन हो सके। सेटेलाइट व्यवस्था बीमा कंपनी के लिए तो ठीक है परंतु आम किसान इसे पसंद नहीं करता है।

क्लेम समय पर मिले तो पूरी हो किसानों की जरूरतें
नोहर के गांव अरडक़ी निवासी किसान महेंद्र कुमार कहना है कि वह चना, ग्वार की खेती कर रहे हैं। फसलों का बीमा भी करवा रहे हैं। गत खरीफ सीजन 2024 का बीमा अब तक नहीं आया है। महेंद्र के अनुसार फसल बीमा का सिस्टम तो ठीक है, परंतु बीमा समय पर किसानों के खातों में आना चाहिए। बीमा रकम समय पर आ जाए तो किसान मौके पर अपनी जरूरत पूरी कर लेता है। फसल बीमा से किसान को काफी आर्थिक सहायता मिलती है। इसे निरंतर व्यवस्थित कर जारी रखना चाहिए। गरीब किसानों के लिए फसल बीमा काफी लाभदायक है।

आज तक नहीं मिला क्लेम
हनुमानगढ़ तहसील क्षेत्र के किसान मोहन लोहरा के अनुसार फसली ऋण लेते ही हमारे खाते से फसल बीमा के नाम पर प्रीमियम काट लिया जाता है। लेकिन जब फसल खराब हो जाती है तो क्लेम देने में सरकार व बीमा कंपनी आनकानी करती है। हमारी सरकार से मांग है कि खराबे के अनुपात में हमें बीमा क्लेम मिले। मोहन के अनुसार हम बीमा करवाते जरूर हैं लेकिन आज तक क्लेम नहीं मिला है।

खराबे के तत्काल बाद मिले राहत
हनुमानगढ़ तहसील क्षेत्र के 22 एनडीआर के किसान बनवारीलाल नायक के अनुसार हम फसलों का बीमा हर सीजन में करवाते हैं। सरकार जितना जल्दी प्रीमियम कटवाने में लगाती है, उतनी जल्दी क्लेम जारी करने में नहीं करती है। इस वजह से कई किसानों का दो से तीन फसलों का क्लेम अब तक बकाया चल रहा है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे किसानों को फसल खराबे पर तत्काल बीमा क्लेम मिले।