-कपास की बिजाई के लिए किसान मांग रहे नहरी पानी
-इस बार सवा दो लाख हेक्टेयर में कपास की बिजाई का लक्ष्य निर्धारित
हनुमानगढ़. भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की बैठक सोलह अप्रेल को चंडीगढ़ में होगी। इसमें राजस्थान सहित अन्य राज्यों को अगले महीने मिलने वाले नहरी पानी का निर्धारण किया जाएगा। बैठक में राजस्थान का प्रतिनिधित्व जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता अमरजीत सिंह मेहरड़ा करेंगे। उन्होंने बताया कि हमारा प्रयास रहेगा कि हम राजस्थान के किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए अधिकतम पानी दिलाएं। लेकिन बांधों में उपलब्ध पानी की समीक्षा के बाद ही शेयर का निर्धारण किया जाएगा। इस बीच कपास की बिजाई के लिए क्षेत्र के किसान नहरी पानी की तरफ नजर लगाए बैठे हैं। इसकी बिजाई का उपयुक्त समय बीस अप्रेल से बीस मई तक माना जाता है। इस स्थिति में जल्द इंदिरागांधी व भाखड़ा नहर में सिंचाई पानी नहीं चलता है तो कपास बिजाई का कार्य प्रभावित होगा। इस बार दो लाख बीस हजार हैक्टेयर में कपास की बिजाई का लक्ष्य रखा गया है। बीटी कॉटन बीज की अनुमति भी अगले सप्ताह तक आने की संभावना है। इस स्थिति में किसानों को अब नहरी पानी मिलने का इंतजार है। हनुमानगढ़ में कृषि विभाग के सहायक निदेशक बीआर बाकोलिया के अनुसार गत वर्ष बीटी कॉटन की मार्च के अंत से बुआई शुरू हो गई थी। मई तक परिवर्तनशील मौसम के बीच कॉटन की बढ़वार अच्छी रही। लेकिन गुलाबी सुंडी के प्रकोप के चलते उत्पादन उम्मीद के अनुसार नहीं हुआ। गत वर्ष के अनुभव से इस सीजन में अग्रिम फसल प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। बिजाई से पूर्व किसानों को चाहिए कि वह अपने खेतों में लगे कॉटन बनसटियों के ढ़ेर का निस्तारण करें। कॉटन की बुआई सही समय (20 अप्रैल से 20 मई तक) तक करें। बीटी कॉटन का एक बीघे में एक पैकेट (475 ग्राम ) पर्याप्त है। एक बीघा में 2- 3 पैकेट डालना बंद करें। क्योंकि अधिक पौधों से अधिक उत्पादन की सोच भी हमेशा कामयाब नहीं होती है। कॉटन में जब फूल दिखाई देने लगे तो खेत में फेरोमेन ट्रैप लगाकर गुलाबी सुंडी के पतंग की निगरानी करनी चाहिए।
सीएम का संकेत
नहरी पानी के मुद्दे पर सीएम भजनलाल ने चुनावी सभा में अच्छे संकेत दिए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि बांधों में उपलब्ध पानी की समीक्षा कर अधिकतम पानी राजस्थान को दिलाने का प्रयास रहेगा। इस बीच बीबीएमबी की टीम ने रणजीत सागर बांध का निरीक्षण करके इसकी रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसी तरह पौंग बांध से कितना पानी प्रवाहित किया जाए तथा कितने पानी का उपयोग होगा, इसकी समीक्षा अब की जानी है। बताया जा रहा है कि इस बार सबकुछ ठीक रहा तो पौंग तथा रणजीत सागर बांध के मरम्मत का कार्य होना है। ऐसे में बांधों का लेवल कुछ नीचा करना पड़ेगा। इसका लाभ राजस्थान को मिल सकता है। नहरी पानी मामले में जिस तरह से राजस्थान सरकार की कसरत चल रही है, उससे लगता है कि इंदिरागांधी नहर में एक रोटेशन सिंचाई पानी मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
जब बंदी नहीं तो मिले पानी
भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने खरीफ फसलों की बिजाई करवाने को लेकर नहरों में सिंचाई पानी चलाने की मांग की है। इसे लेकर सीएम को भी अवगत करवाया है। संगठन के जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह सूडा के अनुसार 19 अप्रैल से इंदिरा गांधी नहर परियोजना व भाखड़ा प्रणाली में नरमा बिजाई के लिए सिंचाई पानी देने की मांग को लेकर सीएम को ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में बताया कि जब नहरबंदी नहीं हो रही है तो फिर किसानों को सिंचाई पानी मिले। ताकि समय पर नरमा फसल की बिजाई हो सके।