इसके चलते रात 9 बजे ही अफसरों को तिघरा से पानी छोडऩा पड़ा। यहां पर भी जल संसाधन विभाग के अफसरों ने सेफ जोन में रहने के लिए पानी को 738 फीट के आंकड़े पर ही छोड़ दिया जबकि पानी को 739 फीट तक भी भरा जा सकता था, क्योंकि विगत वर्षों में तिघरा की मरम्मत पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। बहरहाल इस मामले में निगम आयुक्त विनोद शर्मा ने जल संसाधन विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता एनपी कोरी से बात की तो कोरी ने बताया था कि तिघरा को एक फीट और भरा जा सकता है। इसके लिए विभागीय स्तर पर बातचीत चल रही है। लेकिन देर शाम ही भोपाल स्तर पर अफसरों ने कोई रिस्क न लेने का निर्णय किया और और पानी को बांध से छोड़ दिया गया।
739 फीट जल क्षमता |
शहर का मौसम 21 घंटे में 41.1 एमएम बारिश
पिछले तीन दिन से चल रहा बारिश का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। सुबह जब लोग उठे तो झमाझम बारिश हो रही थी, इसके बाद शाम तक रुक-रुक कर रिमझिम बारिश चलती रही। सुबह 8.30 बजे से शाम 5.30 तक 13.3 एमएम बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार रात को भी जमकर बादल बरसे। रात 11.30 से शनिवार सुबह 8.30 बजे तक 27.8 एमएम बारिश हुई। 21 घंटे में कुल 41.1 एमएम बारिश दर्ज की गई है।
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तीन दिन से मौसम बदला हुआ है और धूप नहीं निकल रही है। बारिश होने से मौसम में ठंडक आ गई है, इससे गर्मी से राहत मिली है। शनिवार को अधिकतम तापमान 27.2 और न्यूनतम 22.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उधर लगातार बारिश से शहर के कई इलाकों में पानी भर जाने से लोग परेशान रहे।
बादल छाए रहेंगे : मौसम वैज्ञानिक सुनील कुमार गोधा के बताया कि अगले चौबीस घंटों में बादल छाए रहेंगे। बारिश न होने से कुछ गर्मी का अहसास भी होगा।
जल संकट बरकरार : तिघरा के गेट खुल जाने के बाद भी जल संकट टला नहीं हैं। क्योंकि पेहसारी बांध और ककेटो बांध में पानी भरा नहीं है। इसलिए अफसर फिलहाल शहर को एक दिन छोडकऱ ही पानी मुहैया कराने की बात कह रहे हैं।
खत्म हुआ इंतजार : अगस्त 2013 के बाद से शहर के लोग लगातार बांध के गेट खुलने का इंतजार कर रहे थे। बीते तीन दिन की बारिश के बांध में क्षमता के हिसाब से पानी आने के बाद शहर के लोगो का इंतजार खत्म हो गया।
रिस्क नहीं ले सकते
बांध की मरम्मत कराई गई थी यह सही बात है। लेकिन बांध 100 साल पुराना है। इसलिए हम कोई जोखिम नहीं ले सकते। इसके लिए भोपाल स्तर पर निर्णय हुआ है। इसलिए पानी छोडऩे का निर्णय लिया गया है।
राजेश चतुर्वेदी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग